2029 के चुनाव में महिलाओं को 33 % आरक्षण मिल सके, इसके लिए सरकार लाएगी नया बिल

देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलने में हो रही देरी को देखते हुए मोदी सरकार अलर्ट हो गई है. सरकार अब 2029 के चुनाव में महिला आरक्षण को लागू करने के लिए संशोधन बिल लाने की तैयारी में है, जिसके लिए विपक्ष के साथ भी बातचीत करेगी.

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2029 के चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने को लेकर मोदी सरकार गंभीर (Photo-BJP) 2029 के चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने को लेकर मोदी सरकार गंभीर (Photo-BJP)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:07 PM IST

मोदी सरकार दिसंबर 2023 में  27 साल से लटके महिला आरक्षण अधिनियम को संसद के विशेष सत्र में पास कराकर इतिहास रच दिया था. इस नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है. अब मोदी सरकार गंभीरता से इसे अमलीजामा पहनाने में जुट गई है, जिसके चलते महिलाओं को आरक्षण का बहुत ज्यादा दिन इंतजार नहीं करना होगा?

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सूत्रों की माने मोदी सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को लागू करने को लेकर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है. सरकार की इच्छा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से ही महिलाओं को इस आरक्षण का लाभ मिल सके. 

संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलने में देरी को देखते हुए सरकार सतर्क हो गई है.  सरकार अब संविधान संशोधन बिल ला सकती है. इसके लिए सरकार ने विपक्षी दलों का मन टटोला शुरू कर दिया है. 

परिसीमन के चलते महिला आरक्षण में देरी
मोदी सरकार ने महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई  (33 फीसदी) आरक्षण देने के लिए 2023 में 128वां संविधान संशोधन कानून के रूप में यह अधिनियम पारित किया गया था. मौजूदा प्रावधानों के मुताबिक महिला आरक्षण नई जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के लागू होने के बाद ही प्रभावी हो सकता है. 

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देश में अभी तक परिसीमन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, इसलिए महिला आरक्षण कानून अब तक लागू नहीं हो पाया है.  पहले जनगणना की जानी है और उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा. कैबिनेट ने 12 दिसंबर 2025 को जनगणना को मंजूरी दी है जो दो चरणों में की जानी है. इसके बाद परिसीमन होगा और फिर जाकर महिला आरक्षण लागू होगा. देरी के चलते विपक्ष ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाया था. ऐसे में मोदी सरकार अब महिला आरक्षण को अमलीजामा पहनाने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहती है. 

2029 के चुनाव में महिला आरक्षण का लाभ
मोदी सरकार अब महिला आरक्षण कानून में संशोधन लाने की संभावना पर विचार कर रही है. सरकार इस बात पर चर्चा कर रही है कि महिला आरक्षण को क्या परिसीमन प्रक्रिया से अलग कर दिया जाए. लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन में देरी भी हो जाए तो 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया जा सके. इस तरह सरकार कोशिश है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर दिया जाए ताकि परिसीमन का इंतजार न करना पडे. 

विपक्षी दलों के साथ चर्चा करेगी सरकार

सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार महिला आरक्षण का बिना परिसीमन के लागू करने के लिए इस मुद्दे परअपने सहयोगी दलों और विपक्षी राजनीतिक दलों से भी चर्चा करेगी. व्यापक राजनीतिक सहमति बनने के बाद ही इस दिशा में आगे बढ़ने का फैसला लिया जाएगा. 

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सरकारी अनुमान के मुताबिक अगली जनगणना की प्रक्रिया 1 मार्च 2027 तक पूरी हो सकती है और उसके बाद उसके परिणाम प्रकाशित किए जाएंगे. इसके बाद परिसीमन आयोग का गठन होगा. आम तौर पर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने में 3–4 साल लग जाते हैं, हालांकि इस बार जनगणना डिजिटल तरीके से हो रही है, इसलिए इसमें कम से कम 2–3 साल लगने का अनुमान है.

सरकार का उद्देश्य है कि 2029 तक संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू किया जा सके, ताकि राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया जा सके. ऐसे में देखना है कि विपक्ष क्या सरकार के कदम पर अपना विश्वास जताएगी या फिर अलग स्टैंड लेगी?

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