लोकसभा में बुधवार को भारी हंगामे और तीखी बहस के बीच स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया. गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए कांग्रेस और विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी पर कड़ा हमला बोला. उन्होंने राहुल गांधी के सदन में आचरण और उनकी अनुपस्थिति को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए.
अमित शाह ने आंकड़ों के जरिए विपक्ष के 'भेदभाव' वाले आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि स्पीकर ने हमेशा कांग्रेस को उनकी सदस्य संख्या के अनुपात में कहीं अधिक समय दिया है. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि 17वीं लोकसभा में कांग्रेस के 52 सांसद थे, लेकिन उनको 157 घंटे 55 मिनट बोला गया. बीजेपी के मुकाबले छह गुना अधिक समय देने का काम स्पीकर ने किया है. 18वीं लोकसभा में कांग्रेस 78 घंटे बोली है, जबकि उनके 99 सदस्य हैं. बीजेपी के मुकाबले दो गुना समय अधिक कांग्रेस को मिला है. जब बोलने का मौका आता है, (राहुल गांधी) जर्मनी होते हैं, इंग्लैंड होते हैं. विपक्ष के नेता को पूछना चाहता हूं कि आप कितना बोले हैं, क्यों नहीं बोले, कौन रोका? कोई नहीं रोका. गलत प्रचार किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता की पार्टी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई है, उस पर भी नहीं बोले. क्यों लाए हो अविश्वास प्रस्ताव. बोलना नहीं चाहते, बोलना चाहते हैं तो नियमों के अनुसार बोलना नहीं आता. विपक्ष के नेता राहुल गांधी की उपस्थिति 17वीं लोकसभा में 51 प्रतिशत रही. 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52 प्रतिशत रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 80 प्रतिशत रहा. इस पर विपक्ष की ओर से हंगामा हुआ. केसी वेणुगोपाल ने कहा कि ये स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बोल रहे हैं या एलओपी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर?
इसके बाद अमित शाह ने कहा कि एक भी बजट, विधेयक पर चर्चा में राहुल गांधी ने भाग नहीं लिया. उनकी पार्टी चार दशक बाद ऐसा प्रस्ताव लेकर आई है, उस पर भी उन्होंने हिस्सा नहीं लिया और ये कहते हैं कि हमें बोलने नहीं देते. कई सारे युगांतकारी विधेयक हैं, इन पर चर्चा में इन्होंने हिस्सा ही नहीं लिया. पूरा शीतकालीन सत्र अनुपस्थित रहे. वित्त विधेयक 24 पर भी चर्चा में हिस्सा नहीं लिया. वक्फ बिल पर चर्चा, हिस्सा नहीं. वंदे मातरम् पर चर्चा, हिस्सा नहीं.
अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के भी बड़े नेता हैं. कई बार सार्वजनिक जीवन में भी ऑब्जर्व किया जाता है. कई बार चुनाव वगैरह में भी जाना पड़ता है. स्वाभाविक है. मगर सवाल है कि यहां नहीं थे तो कहां थे. शीतकालीन सत्र 23 जर्मनी यात्रा पर थे. जब जब संसद सत्र लगता है, विदेश यात्रा लग जाती है और फिर कहते हैं कि बोलने नहीं देते. जो व्यक्ति विदेश में है, यहां कैसे बोलेगा. यहां वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा नहीं है. वरना वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बुलवा देते. ये सदन पक्ष, प्रतिपक्ष, स्पीकर और राष्ट्रपति, इन सबको मिलाकर सदन बनता है.
उन्होंने कहा कि अपने कंडक्ट पर भी तो बात करो. प्रधानमंत्री बैठे हैं, दौड़कर आकर गले लग जाना, ऐसा कभी नहीं हुआ. कभी फ्लाइंग किस करोगे, कभी आंख मटकाओगे, ऐसा कभी नहीं हुआ. स्पीकर के कंडक्ट पर सवाल उठा रहे हो. ये किस तरह से कंडक्ट की बात करते हैं, जब उनके सर्वोच्च नेता ही आंख मारते हैं, आकर प्रधानमंत्री के गले लिपट जाते हैं. फ्लाइंग किस करते हैं. इस पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया. अमित शाह ने कहा कि यदि ऐसा कोई शब्द हो जो असंसदीय हो, तो उसे कार्यवाही से हटा सकते हैं.
अमित शाह के बयान पर विपक्षी दलों के सदस्य भड़क और वेल में आकर जोरदार नारेबाजी की. विपक्षी सदस्यों ने अमित शाह माफी मांगो जैसे नारे लगाएय. इस दौरान चेयर से जगदंबिका पाल ने कहा कि आपने (विपक्ष) चार्जेज लगाए हैं, तो जवाब सुनने का भी धैर्य रखिए. अगर कुछ असंसदीय होगा तो उसे हटा दिया जाएगा रिकॉर्ड से. कांग्रेस सांसद डॉक्टर मोहम्मद जावेद ने कहा कि अमित शाह को माफी मांगनी चाहिए.
aajtak.in