'भारत में अमेरिकी सामानों पर जीरो टैरिफ...?', ट्रंप के दावे की क्या है हकीकत

भारत और अमेरिका ने ट्रेड डील पर सहमति बनने की घोषणा कर दी है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. उन्होंने कहा कि बदले में अमेरिकी उत्पादों पर भारत टैरिफ और गैर-टैरिफ अवरोधों को कम करेगा.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी से फोन पर बात की और टैरिफ डील डन हो गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी से फोन पर बात की और टैरिफ डील डन हो गई.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:15 AM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि उन्होंने भारत के साथ एक व्यापार समझौते पर सहमति बना ली है. इस समझौते के तहत अमेरिका, भारतीय सामानों पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा. ट्रंप ने ये भी दावा किया कि अमेरिकी उत्पादों पर भारत अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ अवरोधों को कम करने जा रहा है, संभवतः कुछ मामलों में अमेरिकी निर्यात पर भारतीय टैरिफ जीरो रहेगा.

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ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की. उन्होंने पीएम मोदी को एक महान मित्र और अपने देश का शक्तिशाली और सम्मानित नेता बताया. ट्रंप ने कहा कि दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों पर चर्चा की. अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीदना बंद करने और इसके बजाय अमेरिका से या संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमति जताई है. उनका कहना था कि यह कदम यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में मदद करेगा.

हालांकि, व्यापार की भाषा में इस तरह का बयान आमतौर पर चुनिंदा अमेरिकी उत्पादों पर ड्यूटी को कम करने या चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की सैद्धांतिक सहमति को दर्शाता है, न कि सभी आयात शुल्कों को तत्काल समाप्त करने को. ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में जिन गैर-टैरिफ अवरोधों का​ जिक्र किया, उनमें विभिन्न प्रतिबंध शामिल होते हैं जैसे- लाइसेंसिंग रूल, कोटा, सर्टिफिकेशन की शर्तें, लोकल सोर्सिंग रूल और रेगुलेटरी मंजूरियां, जो किसी दूसरे देश के उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच को सीमित करती हैं.

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भारत पर टैरिफ 50% से 18% हुआ?

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ये स्पष्ट नहीं किया कि भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर दंड के तौर पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ को हटाया गया है या नहीं. हालांकि, भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में स्पष्ट किया कि फाइनल टैरिफ रेट 18% ही रहेगा. उन्होंने कहा, 'टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति बन चुकी है. अंतिम टैरिफ 18 प्रतिशत ही होगा. इसमें एक घंटा लगे या दो दिन, कुछ तकनीकी औपचारिकताएं पूरी करनी हैं और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने हैं, लेकिन अंतिम आंकड़ा 18 प्रतिशत ही रहेगा.'

डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में दावा कर दिया कि पीएम मोदी ने रूस से तेल नहीं खरीदने पर सह​मति जताई है और इसके बजाय अमेरिका या संवभत: वेनेजुएला से अधिक तेल आयात की बात कही है. लेकिन पीएम मोदी ने अपने 'X' पोस्ट में इस बारे में कोई जिक्र नहीं किया और न ही भारत सरकार की ओर से इस संबंध में कोई बयान है. इसलिए भारत के अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ जीरो करने और रूसी तेल खरीदना बंद करने का ट्रंप का दावा सिर्फ एकतरफा ही है, जब तक भारत की ओर से इस पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आता.

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भारत की व्यापार नीति में बदलाव?

यदि भारत वास्तव में अमेरिका के लिए गैर-टैरिफ अवरोधों को खत्म करता है, तो यह लंबे समय से चली आ रही उसकी ट्रेड पॉलिसी में बड़ा बदलाव होगा, जो पारंपरिक रूप से घरेलू उद्योगों को समर्थन देने के लिए संरक्षात्मक उपायों पर निर्भर रही है. इससे अमेरिका निर्मित वस्तुओं, उसके कृषि उत्पादों और ऊर्जा आपूर्ति के लिए भारतीय बाजार और खुल सकता है. हालांकि, भारत की ओर से अभी तक ऐसे किसी भी अवरोध को हटाने की कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि नई दिल्ली अपनी व्यापार नीति को कितना उदार बनाने के लिए तैयार है. ट्रंप के दावों के उलट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे (अमेरिका के टैरिफ कम करने को) 'मेक इन इंडिया' उत्पादों के लिए बूस्ट बताया.

कार्यान्वयन पर बहुत कम विवरण

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर दोनों पक्षों की ओर से उच्च-स्तरीय घोषणाओं के बावजूद, समझौते के कई पहलू अभी भी अस्पष्ट हैं. ट्रंप की पोस्ट में यह नहीं बताया गया कि व्यापार अवरोध कैसे कम होंगे, या भारत ने किन अमेरिकी उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है. दोनों पक्षों ने अभी तक समझौते का विस्तृत ढांचा जारी नहीं किया है. अमेरिका के साथ यह व्यापार समझौता भारत के यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन करने के कुछ दिन बाद आया है. भारत और ईयू के बीच 96 प्रतिशत से अधिक व्यापारित वस्तुओं पर टैरिफ कम करने या खत्म करने की उम्मीद है, हालांकि प्रमुख कृषि उत्पादों को इससे बाहर रखा गया था.
 

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