सुप्रीम कोर्ट में आयोजित 'इंडियन विमेन इन लॉ' के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन में देश भर की महिला जजों और वकीलों ने हिस्सा लिया. इस ऐतिहासिक मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस नागरत्ना ने कानूनी पेशे में महिलाओं की चुनौतियों और भविष्य पर बेबाक राय रखी.
CJI सूर्यकांत ने कानूनी पेशे में महिलाओं की बहादुरी को सराहा. उन्होंने बताया कि महज एक सदी पहले औपनिवेशिक शासन में महिलाओं को कानून की प्रैक्टिस करने तक की अनुमति नहीं थी. हालांकि, CJI ने ये भी कहा कि संस्थानों में महिलाओं की समान भागीदारी का सफर अभी अधूरा है.
CJI के मुताबिक, कानूनी पेशे ने अनजाने में एक ऐसा माहौल बना दिया है जो महिलाओं पर 'अदृश्य बोझ' डालता है, जिसमें देर रात तक काम, बार-बार पूछे जाने वाले सवाल और परिवार की उम्मीदें शामिल हैं.
बेंच में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी
प्रतिनिधित्व की अहमियत पर जोर देते हुए CJI ने कहा कि बेंच पर बैठने वाली हर महिला एक बड़ा संदेश देती है. उन्होंने हाई कोर्ट के कॉलेजियम से अनुरोध किया कि वो सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही उन महिला वकीलों के नामों पर भी विचार करें जो उनके राज्यों से जुड़ी हैं, ताकि उन्हें जज के रूप में प्रमोशन दिया जा सके.
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जस्टिस नागरत्ना ने सुनाया किस्सा
जस्टिस नागरत्ना ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए अपने पुराने दिनों का एक किस्सा साझा किया. उन्होंने बताया कि एक बार कोर्ट में पुरुष वकील आगे बढ़ने की होड़ में थे, तब जज ने उन्हें पहले मौका देते हुए 'विमेंस डे' की बधाई दी. जस्टिस नागरत्ना ने तब कहा था, 'माय लॉर्ड, मेरी इच्छा है कि हर दिन महिला दिवस हो.'
30% आरक्षण और वर्क-लाइफ बैलेंस की मांग
जस्टिस नागरत्ना ने सरकार और सिस्टम के सामने कुछ ठोस प्रस्ताव रखे. उनके मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारों के पैनल वकीलों में कम से कम 30% महिलाएं होनी चाहिए. उन्होंने हाई कोर्ट को अगले दिन की 'कॉजलिस्ट' शाम 5 बजे तक जारी करने की भी मांगी की, ताकि महिला वकील समय पर घर जाकर तैयारी कर सकें और परिवार को समय दे सकें.
जस्टिस नागरत्ना ने प्रस्ताव में कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं बार में आती हैं, लेकिन शादी और बच्चों के बाद वो अपने इस करियर को जारी नहीं रख पातीं. ऐसे में सीनियर वकील ऐसी महिलाओं को सपोर्ट करें. उन्होंने कहा, 'हम अपना हक इसलिए मांग रहे हैं क्योंकि हम इसके काबिल और हकदार हैं, न कि सिर्फ इसलिए कि हम महिलाएं हैं.'
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आंकड़ों में बदलाव की तस्वीर
सम्मेलन में बताया गया कि जिला स्तर पर अब 37% न्यायिक अधिकारी महिलाएं हैं, जो एक बड़े बदलाव का संकेत है. जस्टिस लिसा गिल की पदोन्नति के बाद अब देश के तीन हाई कोर्ट्स में महिला मुख्य न्यायाधीश होंगी.
अनीषा माथुर