कैसे आधे दशक में 45 गुना बढ़ गया बंगाल सरकार का दुर्गा पूजा फंड? अब देना होगा इसका जवाब

पंडालों की चमक और रंगीनी सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं रही. पिछले छह सालों में बंगाल सरकार ने पूजा समितियों को फंड के रूप में मदद के पंख दे दिए, बजट से कई गुना ज्यादा खर्च किया और हर समिति को करोड़ों का फायदा पहुंचाया. चुनावी साल में बढ़ती रकम ने इसे सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति भी बना दिया है. इस साल भी पूजा ग्रांट में 30% की बढ़ोतरी के साथ ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है.

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पूजा समितियों पर बंगाल सरकार कर रही करोड़ों का खर्च पूजा समितियों पर बंगाल सरकार कर रही करोड़ों का खर्च

पियूष अग्रवाल

  • कोलकाता/नई दिल्ली ,
  • 24 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 6:03 PM IST

पश्च‍िम बंगाल के सबसे बड़े त्योहार दुर्गापूजा को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जुलाई के आखिर में एक बड़ा ऐलान किया था. उन्होंने कहा था कि रजिस्टर्ड पूजा कमेटियों को दी जाने वाली वित्तीय मदद में 30% की बढ़ोतरी की जाएगी. पूरे राज्य में ऐसी करीब 45,000 कमेटियां हैं. इस वजह से राज्य सरकार पर करीब 500 करोड़ रुपये का खर्च आने वाला है, जो पिछले साल के 380 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है. 

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बता दें कि ये कोई इसी बार लिया गया पहला फैसला नहीं है. राज्य के बजट दस्तावेज बताते हैं कि पिछले छह सालों में दुर्गा पूजा पर सरकारी खर्च कई गुना बढ़ा है. साल 2019-20 से लेकर 2025-26 तक पूजा आयोजकों को दिए जाने वाले बजटेड ग्रांट्स लगभग 45 गुना बढ़ गए हैं. इसमें दिलचस्प बात ये है कि असल खर्च अक्सर बजट अनुमान से कहीं ज्यादा रहा है.

बजट बनाम असल खर्च

उदाहरण के लिए वित्त वर्ष 2020 (FY20) में सरकार ने पूजा ग्रांट के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था लेकिन असल खर्च 61 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. ये बजट से छह गुना ज्यादा रहा. 

आगे ये ट्रेंड लगातार चलता रहा. FY21  में राज्य ने 40 करोड़ रुपये तय किए लेकिन ये खर्च करीब 197 करोड़ हुआ यानी ये लगभग पांच गुना ज्यादा था. 

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FY25 तक आते-आते बजट 320 करोड़ रुपये तक पहुंच गया लेकिन संशोधित आंकड़ों में असल खर्च 385 करोड़ रुपये रहा यानी लगभग 20 प्रतिशत ज्यादा. 

अब FY26 में भी यही पैटर्न दिखने की संभावना है. बजट में 448 करोड़ रुपये रखे गए हैं लेकिन चुनावी साल होने की वजह से असल खर्च इससे भी ऊपर जाने का अनुमान है. गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव 2026 में होने वाले हैं.

प्रति कमेटी दिए जाने वाले फंड में भी बड़ी बढ़ोतरी

कुल खर्च बढ़ने के साथ-साथ सरकार ने हर कमेटी को मिलने वाली मदद भी साल-दर-साल बढ़ाई है. यह रकम 2018 में 10,000 रुपये थी. फिर 2020 में इसे बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया और 2021 तक ये वहीं रही. इसके बाद हर साल इसमें बढ़ोतरी हुई. 2024 में राशि 85,000 रुपये हो गई और 2025 में इसे बढ़ाकर 1.1 लाख रुपये कर दिया गया यानी इस बार 30 प्रतिशत की छलांग लगी. यानी सात सालों में ये रकम 11 गुना बढ़ चुकी है.

इसी तरह रजिस्टर्ड कमेट‍ियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. ज्यादा कमेट‍ियां होने से प्रति कमेटी रकम भी साल दर साल बढ़ रही है. ये सरकार का सालाना खर्च बढ़ा रहे हैं. ये बढ़ोतरी अक्सर चुनाव से पहले के सालों में देखने को मिली है. जैसे 2020 में प्रति कमेटी दी जाने वाली मदद को दोगुना कर 50,000 रुपये कर दिया गया. उसी साल असली खर्च बजट से पांच गुना ज्यादा हो गया.

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अदालत की सख्ती

इतनी तेज बढ़ोतरी पर अब अदालत ने भी नजर कड़ी की है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ वही क्लब अगली मदद के हकदार होंगे जिन्होंने पिछले साल के फंड का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा किया है. यही नहीं, कोर्ट ने सरकार को भी आदेश दिया है कि पूजा खत्म होने के बाद डिस्बर्समेंट और कंप्लायंस रिपोर्ट पेश करनी होगी. 

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