देश और इसके आसपास के इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ और विभिन्न चक्रवाती परिसंचरण के सक्रिय होने के कारण कई राज्यों में बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रहेगा. दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक का दौर 1 अप्रैल तक रुक-रुक कर बना रह सकता है. इससे तापमान में मामूली गिरावट के साथ वातावरण ठंडा और नम बना रहेगा.
पश्चिमी हिमालय में अगले 7-8 दिनों तक रुक-रुक कर बर्फबारी और बारिश होने की संभावना है. इस दौर दिल्ली में फिर से बारिश हो सकती है. उत्तर प्रदेश में भी आज यानी 31 मार्च को बारिश और गरज-चमक की संभावना है. वहीं, पूर्वोत्तर भारत में अगले कुछ दिनों तक छिटपुट बारिश और गरज-चमक जारी रह सकती है, जिससे स्थानीय जलस्तर और नदियों के जल प्रवाह में बदलाव आ सकता है.
ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में 31 मार्च और 2 अप्रैल को बारिश और गरज-चमक का दौर चलने की संभावना है. मध्य प्रदेश में भी अगले कुछ दिनों तक इसी तरह की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं. दक्षिण और पश्चिम भारत में विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में 31 मार्च से 3 अप्रैल के बीच बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है. इसके अलावा केरल और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी छिटपुट बारिश और गरज-चमक जारी रह सकती है.
मौसम की यह गतिविधियां मुख्य रूप से उत्तरी ईरान और कैस्पियन सागर के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ, उत्तर-पश्चिम राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण, बिहार से झारखंड होते हुए गंगीय पश्चिम बंगाल तक फैली ट्रफ रेखा, उत्तरी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में चक्रवाती परिसंचरण, असम और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में सक्रिय परिसंचरणों के कारण हो रही हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि नया पश्चिमी विक्षोभ 2 अप्रैल से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिससे मौसम और अधिक अस्थिर हो सकता है.
अगले कुछ दिनों में मौसम के अनुसार यात्रियों और आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी गई है. विशेषकर पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बारिश से सड़क और यातायात प्रभावित हो सकता है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के कारण दिन का तापमान कम रहेगा.
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