केंद्रीय बजट 2026-27 ने भारत की ग्रामीण रोजगार नीति में बड़ा और अहम बदलाव का संकेत दिया है. लंबे समय से चल रही मनरेगा योजना, जिसे 2006 में एक अधिकार आधारित रोजगार गारंटी कानून के रूप में शुरू किया गया था, अब धीरे-धीरे हाशिये पर जाती दिख रही है. इसकी जगह सरकार ने नई योजना विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G को ग्रामीण रोजगार का नया मुख्य आधार बनाने का संकेत दिया है.
इस बजट में VB-G RAM G के लिए 95,692 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो ग्रामीण विकास विभाग की सबसे बड़ी स्कीम बन गई है. इसके मुकाबले मनरेगा का बजट 2025-26 के 86,000 करोड़ रुपये से घटाकर सिर्फ 30,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह कटौती इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि पिछले साल मनरेगा के संशोधित अनुमान 88,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गए थे, ताकि बढ़ती मांग और बकाया मजदूरी का भुगतान किया जा सके.
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दिलचस्प बात यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में न तो मनरेगा के बजट में कटौती का जिक्र किया और न ही नई VB-G RAM G स्कीम पर खुलकर चर्चा की. इससे यह सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या मनरेगा के लिए दी गई राशि सिर्फ पुराने बकायों को निपटाने के लिए है, या फिर यह एक सीमित ट्रांजिशन पीरियड है, जिसके बाद पूरी तरह नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी.
ग्रामीण रोजगार पर कुल खर्च 1.25 लाख करोड़ रुपये
अगर दोनों योजनाओं के आवंटन को मिलाकर देखा जाए तो 2026-27 में ग्रामीण रोजगार पर कुल खर्च 1.25 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बैठता है, जो पिछले साल के मनरेगा बजट से करीब 43 फीसदी अधिक है. इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे मनरेगा की जगह नई स्कीम लाना चाहती है.
इस बदलाव पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बजट भाषण में चुप्पी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर मनरेगा को कमजोर कर रही है. उनका कहना है कि सरकार पहले ही मन बना चुकी है कि मनरेगा को खत्म करना है, लेकिन साफ-साफ कुछ नहीं बताया जा रहा.
VB-G RAM G में केंद्र और राज्य को देना होगा फंड
VB-G RAM G को दिसंबर 2025 में कानून के जरिए पेश किया गया था. यह योजना मनरेगा की जगह लेने के लिए बनाई गई है. इसमें एक बड़ा बदलाव यह है कि ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले काम की कानूनी गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है. रोजगार मांगने का अधिकार और 15 दिन में काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता जैसे अधिकार मनरेगा की तरह इसमें भी बने रहेंगे.
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लेकिन फंडिंग मॉडल में बड़ा फर्क है. मनरेगा में जहां अकुशल मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, वहीं VB-G RAM G में खर्च का बंटवारा किया गया है. केंद्र 60 फीसदी खर्च देगा और राज्यों को 40 फीसदी हिस्सा देना होगा. पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 रहेगा.
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी बढ़ेगा!
नई योजना में काम के प्रकार भी ज्यादा तयशुदा होंगे. जल सुरक्षा, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका से जुड़े काम और जलवायु से निपटने वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जाएगी. टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी बढ़ेगा, जैसे बायोमेट्रिक अटेंडेंस, डिजिटल डैशबोर्ड और जियो-स्पेशल प्लानिंग.
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बजट का बचाव करते हुए कहा कि यह गांव-केंद्रित विकास की दिशा में बड़ा कदम है. उन्होंने दावा किया कि राज्यों के हिस्से को जोड़कर VB-G RAM G के लिए कुल फंड 1.51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा, जो ऐतिहासिक है.
फिर भी जमीनी स्तर पर कई सवाल बने हुए हैं. क्या आर्थिक दबाव में चल रहे राज्य इतना बड़ा खर्च उठा पाएंगे. क्या ट्रांजिशन के दौरान मजदूरी भुगतान प्रभावित होगा और क्या VB-G RAM G, संकट के समय मनरेगा जैसी सुरक्षा दे पाएगा. इतना तय है कि बजट 2026-27 ने सिर्फ योजना नहीं बदली, बल्कि ग्रामीण रोजगार की पूरी सोच को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश की है.
श्रेया चटर्जी