ओमान की बैठक हुई फेल तो जल उठेगा मिडिल ईस्ट! आर-पार की तैयारी में अमेरिका और ईरान

अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में होने वाली अहम बैठक से पहले दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर है. अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के सीक्रेट बंकर को टारगेट किया है, जबकि अरब सागर में अमेरिकी सेना ने ईरानी ड्रोन को मार गिराया है. ईरान ने मिसाइल परीक्षण और नया अंडरग्राउंड मिसाइल सेंटर भी खोला है.

Advertisement
ओमान में बैठक पर टिकीं सबकी नजरें. (photo: ITG) ओमान में बैठक पर टिकीं सबकी नजरें. (photo: ITG)

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:54 PM IST

अमेरिका और ईरान की बीच जारी गतिरोध के चलते मिडिल ईस्ट में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है. अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में महज चंद घंटे बाकी हैं, लेकिन दोनों देशों की सेनाएं पहले से ही आमने-सामने आ चुकी हैं. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के सीक्रेट बंकर का टारगेट लॉक कर लिया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर ओमान की बैठक नाकाम रही तो क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खामेनेई के बंकर पर हमले का आदेश दे देंगे?

उधर, कतर-तुर्किए और मिस्र की मध्यस्थता से कराई जा रही मीटिंग में ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर चर्चा होनी है. बैठक की मेजबानी ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी करेंगे, जिसमें ईरान की ओर से अब्बास अराघची और अमेरिका की तरफ से जेरेड कुशनर व स्टीव विटकॉफ शामिल होंगे. हालांकि, बैठक से पहले ही अरब सागर में अमेरिकी सैन्य बेड़े ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है. ये घटना दोनों पक्षों द्वारा बैठक से पहले अपनी सैन्य ताकत और इरादों का प्रदर्शन करने के रूप में देखी जा रही है. अमेरिका ने पहले ही क्षेत्र में अपनी सेना बढ़ा दी है, जबकि ईरान ने भी मिसाइल परीक्षण और नया अंडरग्राउंड मिसाइल सेंटर का खुलासा किया है.

Advertisement

'शांति की गुंजाइश बेहद कम'

बताया जा रहा है कि ओमान में होने वाली इस मीटिंग की सफलता की गुंजाइश बेहद कम नजर आ रही है. इसका मुख्य कारण दोनों देशों के बीच एजेंडे को लेकर गहरा मतभेद है.

अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ मिसाइल प्रोग्राम पर भी चर्चा करे, लेकिन ईरान केवल परमाणु मुद्दे पर बात करने को तैयार है.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि इस डील का निकलना मुश्किल है. दोनों मुल्कों का अड़ियल रुख ये साफ कर रहा है कि डिप्लोमेसी से ज्यादा सैन्य विकल्प हावी हो सकते हैं.

ईरान ने किया आरपार का ऐलान

ईरान के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल सैय्यद अब्दुलरहीम मूसावी ने मीटिंग से ठीक पहले अमेरिका को खुली चुनौती दी है. ईरान ने न केवल अपनी मिसाइलों का परीक्षण किया, बल्कि एक नए अंडरग्राउंड मिसाइल सेंटर का उद्घाटन भी किया है.

मूसावी ने साफ कर दिया कि ईरान अपने मिसाइल प्रोग्राम पर कोई चर्चा नहीं करेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि दुश्मन की एक छोटी-सी गलती उन्हें कार्रवाई की खुली छूट दे देगी और तब कोई भी अमेरिकी सुरक्षित नहीं रहेगा. ईरान का दावा है कि उनके पास अमेरिका और उसके सहयोगियों को 'जलाने' की पूरी क्षमता है.

Advertisement

खामेनेई के सलाहकार की चेतावनी

उधर, ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं. उन्होंने कहा कि ईरान की किसी देश पर हमला करने की मंशा नहीं है, लेकिन अमेरिका और इजरायल जैसे किसी भी विदेशी दुश्मन के खिलाफ वे 'प्रतिरोध के स्तंभ' के रूप में खड़े हैं.

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी संप्रभुता के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है.

दूसरी ओर अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की रणनीति फिलहाल ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की है, ताकि बिना युद्ध के ही उसे सरेंडर के लिए मजबूर किया जा सके.

ट्रंप का प्लान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान के खिलाफ एक विस्तृत सैन्य और कूटनीतिक प्लान तैयार है. ट्रंप का अंतिम लक्ष्य केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ईरान में खामेनेई सरकार का तख्तापलट करवाना भी हो सकता है. अमेरिका ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर आंतरिक अस्थिरता पैदा करना चाहता है. हालांकि, इस योजना में सबसे बड़ी रुकावट ईरान की सेना है जो खामेनेई के साथ मजबूती से खड़ी है. अगर ओमान की बैठक बेनतीजा रही तो अगले कुछ घंटों में खाड़ी क्षेत्र में बारूद बरसने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement