उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश से जुड़े यूएपीए (UAPA) मामले में पिछले साढ़े पांच साल से जेल में बंद जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उमर खालिद की तीन दिनों की अंतरिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है.
खालिद को यह राहत अस्पताल में भर्ती उनकी मां की मेजर सर्जरी के दौरान उनके साथ रहने के लिए दी गई है. हालांकि, हाईकोर्ट ने रिहाई के साथ बेहद कड़े प्रतिबंध भी लागू किए हैं. उनकी सुरक्षा और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उनके मूवमेंट के दायरे को पूरी तरह सीमित कर दिया है.
जमानत शर्त में अदालत ने साफ किया है कि खालिद को दिल्ली में अपने तय पते (घर) पर ही रुकना होगा. वह केवल अपनी मां से मिलने अस्पताल जा सकते हैं, इसके अलावा उन्हें किसी भी अन्य जगह या सार्वजनिक स्थान पर जाने की अनुमति नहीं होगी.अंतरिम जमानत पर बाहर आने के लिए उमर खालिद को ₹1 लाख का जमानती बांड (Surety) भरना होगा.
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पूरी अवधि के दौरान उमर खालिद केवल एक ही चालू मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिसकी जानकारी जांच एजेंसी को देनी होगी. इससे पहले निचली अदालत ने उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि परिवार में अन्य सदस्य भी मां की देखभाल के लिए मौजूद हैं. इसके बाद खालिद ने हाईकोर्ट का रुख किया. उनके वकील ने दलील दी कि मां की गंभीर सर्जरी के वक्त एक बेटे का उनके साथ होना बेहद जरूरी है.
सृष्टि ओझा