'ट्रंप से पीएम मोदी ही नहीं, भारत की जनता भी नाराज', अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे पर पूर्व भारतीय राजदूत की दो टूक

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को एक बैठक के दौरान कहा था कि उनके और पीएम मोदी के बीच निजी संबंध अच्छे हैं, लेकिन व्यापारिक और रणनीतिक मोर्चे पर पीएम मोदी उनसे नाराज हैं. इस पर संयुक्त राष्ट्र (जेनेवा) में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि दिलीप सिन्हा की कड़ी प्रतिक्रिया आई है.

Advertisement
पूर्व राजदूत ने कहा कि ट्रंप का यह कहना कि 'मोदी खुश नहीं हैं', एक बहुत ही हल्का बयान है. (File Photo- PTI) पूर्व राजदूत ने कहा कि ट्रंप का यह कहना कि 'मोदी खुश नहीं हैं', एक बहुत ही हल्का बयान है. (File Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:40 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत को लेकर दिए गए हालिया बयान ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है. जहां ट्रंप ने दावा किया कि पीएम मोदी रूस से तेल खरीदने के कारण उन पर लगाए गए टैरिफ से खुश नहीं हैं, वहीं अब इस पर कड़ी प्रतिक्रिया आई है. संयुक्त राष्ट्र (जेनेवा) में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि दिलीप सिन्हा ने ट्रंप के दावों को वास्तविकता से परे बताते हुए उन्हें आईना दिखाया है.

Advertisement

दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को एक बैठक के दौरान कहा था कि उनके और पीएम मोदी के बीच निजी संबंध अच्छे हैं, लेकिन व्यापारिक और रणनीतिक मोर्चे पर पीएम मोदी उनसे नाराज हैं. ट्रंप के अनुसार, भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के फैसले के कारण अमेरिका ने उन पर ऊंचे टैरिफ लगाए हैं. ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत को मुझे खुश करना जरूरी है और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका भारत पर टैरिफ और भी तेजी से बढ़ा सकता है.

ट्रंप के इस बयान पर पूर्व राजदूत दिलीप सिन्हा ने कहा कि ट्रंप का यह कहना कि 'मोदी खुश नहीं हैं', एक बहुत ही हल्का बयान (Understatement) है. उन्होंने स्पष्ट किया कि न केवल प्रधानमंत्री, बल्कि भारत की जनता भी ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ है.

Advertisement

दिल्ली में न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में दिलीप सिन्हा ने कहा, “मुझे कहना होगा कि राष्ट्रपति ट्रंप का ह्यूमर सेंस बहुत अच्छा है. यह कहना कि प्रधानमंत्री मोदी खुश नहीं हैं, एक तरह से कमतर आकलन है. एक प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी सार्वजनिक रूप से तीखे बयान नहीं दे सकते, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भारत की जनता की भावना को नजरअंदाज किया जाए. भारत में जनमत राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ बेहद मजबूत है और इसके पीछे ठोस कारण हैं."

'भारत पर लगाए गए टैरिफ को अत्यंत अनुचित'

दिलीप सिन्हा ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को अत्यंत अनुचित बताते हुए कहा कि अमेरिका ने किसी भी देश के मुकाबले भारत पर सबसे ऊंचे टैरिफ लगाए हैं. उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय कंपनियां रूस के मामले में अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का भी पालन कर रही हैं, जबकि ये प्रतिबंध खुद संयुक्त राष्ट्र के नियमों के खिलाफ हैं. 

उन्होंने याद दिलाया कि किसी भी देश पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को है, न कि किसी एक देश को. चूंकि यूएन सुरक्षा परिषद ने रूस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है, इसलिए भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत रूस से तेल खरीदने के अपने अधिकार का प्रयोग कर रहा है.

Advertisement

'भारत को निशाना बनाना दोहरा मापदंड'

उन्होंने यह भी कहा कि रूस से ऊर्जा खरीदने के मामले में भारत को निशाना बनाना दोहरा मापदंड है. उन्होंने कहा कि यूरोप खुद रूस से प्राकृतिक गैस खरीदता है. अमेरिका भी रूस से कई उत्पाद आयात करता है और उसके साथ व्यापार करता है. ऐसे में भारत को दंडित करना समझ से परे है. अमेरिका रूस पर जिन प्रतिबंधों की बात करता है, उनमें से कई का पालन भारतीय कंपनियां पहले ही कर रही हैं, तो भारत को किस बात के लिए सजा दी जा रही है, यह समझना मुश्किल है. इस स्थिति में, कोई कारण नहीं है कि भारतीय ट्रंप से खुश हों.

ट्रंप ने भारत पर लगाए थे टैरिफ पर टैरिफ

गौरतलब है कि पिछले साल ट्रंप ने टैरिफ को लेकर भारत के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था. उन्होंने भारत पर 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था. इसके अलावा रूसी तेल खरीदने को लेकर 25 फीसदी का अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ भी लगाया गया था. इस तरह कुछ श्रेणियों में कुल शुल्क 50 फीसदी तक पहुंच गया था. इस फैसले के बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों में खासी तल्खी देखने को मिली थी. भारत ने उस समय साफ किया था कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर फैसले करता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement