4 महीने, 4 फैसले और चार झटके... मोदी सरनेम मानहानि मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

कर्नाटक में मोदी सरनेम को लेकर दिए बयान को लेकर सूरत की निचली अदालत ने राहुल गांधी को 23 मार्च को 2 साल की सजा सुनाई थी. इसके बाद उनकी संसद सदस्यता रद्द हो गई थी. राहुल गांधी ने इस फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट का रुख किया था. हालांकि, उन्हें वहां भी राहत नहीं मिली. अब उन्हें हाईकोर्ट से भी झटका लगा है.

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राहुल गांधी (फाइल फोटो- पीटीआई) राहुल गांधी (फाइल फोटो- पीटीआई)

aajtak.in

  • अहमदाबाद,
  • 07 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 11:02 PM IST

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा. गुजरात हाईकोर्ट ने 'मोदी सरनेम' मानहानि मामले में निचली अदालत से मिली 2 साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही मानते हुए राहुल गांधी की याचिका को खारिज कर दिया. 2019 चुनाव के दौरान कर्नाटक में एक रैली के दौरान 'मोदी सरनेम' को लेकर दिए बयान पर सूरत की निचली अदालत ने राहुल को इस साल 23 मार्च को सजा सुनाई थी. इसके बाद से राहुल गांधी के खिलाफ करीब चार महीने में अलग अलग कोर्ट के चार फैसले आए हैं.  


2019 में राहुल ने दिया था बयान:

राहुल गांधी ने कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल 2019 को चुनावी रैली में कहा था, ''नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?'' 

 

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- राहुल के इस बयान को लेकर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ धारा 499, 500 के तहत आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था. अपनी शिकायत में बीजेपी विधायक ने आरोप लगाया था कि राहुल ने 2019 में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पूरे मोदी समुदाय को कथित रूप से यह कहकर बदनाम किया कि सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?

23 मार्च 2023 : निचली अदालत ने सुनाई सजा

- राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के मामले में चार साल बाद 23 मार्च को सूरत की निचली अदालत ने राहुल को दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा सुनाई. 

24 मार्च 2023: राहुल की संसद सदस्यता रद्द

राहुल को कोर्ट से दोषी ठहराने जाने के बाद लोकसभा सचिवालय की ओर से उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी. राहुल केरल के वायनाड से सांसद थे. दरअसल, जनप्रतिनिधि कानून में प्रावधान है कि अगर किसी सांसद और विधायक को किसी मामले में 2 साल या उससे ज्यादा की सजा होती है, तो उनकी सदस्यता (संसद और विधानसभा से) रद्द हो जाती है. इतना ही नहीं सजा की अवधि पूरी करने के बाद छह वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य भी हो जाते हैं.

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20 अप्रैल: सेशन कोर्ट से राहुल को लगा झटका

राहुल गांधी ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सूरत सेशन कोर्ट का रुख किया था. सेशन कोर्ट ने राहुल की याचिका खारिज करते हुए कहा, सांसद और देश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के पूर्व प्रमुख होने के नाते राहुल गांधी को अधिक सावधान रहना चाहिए था. 

25 अप्रैल: हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा 

राहुल गांधी ने निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हालांकि, हाईकोर्ट ने मई में राहुल को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया. तब हाईकोर्ट ने कहा था कि गर्मियों की छुट्टी के बाद इस पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा. 

7 जुलाई: हाईकोर्ट ने याचिका की रद्द

कोर्ट ने 'मोदी सरनेम' मानहानि मामले में निचली अदालत से मिली 2 साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार करते हुए राहुल गांधी की याचिका को खारिज कर दिया. हाईकोर्ट के जज जस्टिस हेमंत पृच्छक ने निचली अदालत का फैसला उचित माना. 

राहुल के पास अब क्या विकल्प? 

राहुल को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. हालांकि, अभी राहुल गांधी के पास हाईकोर्ट में डिविजन बेंच में अपील करने का मौका है. वे चाहें तो सुप्रीम कोर्ट भी जा सकते हैं. अगर सुप्रीम कोर्ट राहुल की सजा पर रोक लगा देती है, तो उनकी सदस्यता फिर से बहाल हो सकती है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली, तो वे 2024 लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे.
 

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