मणिपुर में नए सिरे से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं जिसने एक बार फिर सुरक्षा तंत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं. शनिवार को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नागा और कुकी-जो (Kuki-Zo) नागरिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर भारी विरोध-प्रदर्शन किया.
यह ताजा आक्रोश कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं (पादरियों) की हत्या और कई नागा नागरिकों के कथित अपहरण की घटनाओं के बाद फूटा है, जिसने राज्य में जातीय तनाव को फिर से हवा दे दी है.
कांगपोकपी जिले के कांगलातोंगबी में 6 लापता नागा नागरिकों की सुरक्षित रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज हो गए हैं. 'कौब्रू रेंज लियांगमई विमेंस यूनियन' के नेतृत्व में जारी यह आंदोलन शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रहा, जिसमें कई आदिवासी और नागरिक समाज संगठनों ने हिस्सा लिया.
प्रदर्शनकारियों के हाथों में "बंधक इंसान हैं, कोई हथियार नहीं" और "हमारी सरकार कहां है?" जैसे नारों वाली तख्तियां थीं. आयोजकों के मुताबिक, 13 मई को हुए एक हमले के बाद लेइलोन वाइफेई गांव से 20 नागा नागरिकों का अपहरण कर लिया गया था. हालांकि इनमें से 14 लोग रिहा हो चुके हैं, लेकिन 6 नागरिक अब भी लापता हैं. सिविल सोसायटी के लोगों ने केंद्र और मणिपुर सरकार से तुरंत दखल देने की अपील की है.
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चूराचांदपुर में कुकी-जो समुदाय की महारैली
दूसरी तरफ, चूराचांदपुर जिले में 'कुकी विमेन ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स' (KWOHR) के बैनर तले हजारों लोगों ने एक विशाल आक्रोश रैली निकाली. यह रैली इस हफ्ते की शुरुआत में कांगपोकपी के कोटज़िम और कोटलेन इलाकों के बीच तीन कुकी-जो पादरियों की नृशंस हत्या के खिलाफ आयोजित की गई थी. प्रदर्शनकारी 'पादरियों के लिए न्याय' और 'एनएससीएन-आईएम (NSCN-IM) हत्याएं बंद करो' के नारे लगा रहे थे. कोइते गांव के मैदान से शुरू हुआ यह मार्च तुइबोंग स्थित 'वॉल ऑफ रिमेंब्रेंस' पर जाकर समाप्त हुआ.
महारैली के बाद संगठन ने चूराचांदपुर के उपायुक्त (DC) के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन सौंपा. इस ज्ञापन में कुकी-जो संगठन ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई हैं:
राष्ट्रपति शासन: मणिपुर में सुरक्षा की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) दोबारा लागू किया जाए.
अतिरिक्त बल की तैनाती: कुकी-जो बहुल इलाकों में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई जाए और पादरियों की हत्या की उच्च स्तरीय जांच हो.
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अलग प्रशासन की मांग: स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संविधान के तहत कुकी-जो लोगों के लिए 'अलग प्रशासन' की पुरानी मांग को फिर से दोहराया गया.
मणिपुर में बार-बार भड़क रही यह हिंसा और दोनों समुदायों का सड़कों पर उतरना यह साफ दिखाता है कि तमाम शांति अपीलों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है.
बेबी शिरीन / इंद्रजीत कुंडू