जंग के बीच भी दिल्ली से साफ तेहरान की हवा... चौंकाने वाला है ईरान का AQI

एयर क्वालिटी डेटा ने यह चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा है कि युद्ध के माहौल के बावजूद तेहरान का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) दिल्ली की तुलना में बेहतर बना हुआ है.

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तेहरान के तेल डिपो पर हमले के बाद निकलता धुएं का गुबार (File Photo: AP) तेहरान के तेल डिपो पर हमले के बाद निकलता धुएं का गुबार (File Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:54 PM IST

ईरान में बम धमाकों, मिसाइल हमलों और तेल डिपो में लगी आग के बावजूद तेहरान की हवा भारत की राजधानी दिल्ली से ज्यादा साफ दर्ज की गई है. हालिया एयर क्वालिटी डेटा ने यह चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा है कि युद्ध के माहौल के बावजूद तेहरान का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) दिल्ली की तुलना में बेहतर बना हुआ है.

रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 90 लाख आबादी वाले तेहरान का AQI 50-70 के बीच यानी 'संतोषजनक' श्रेणी में है. वहीं दिल्ली का AQI अक्सर 150-300 के बीच 'खराब से बेहद खराब' श्रेणी में बना हुआ है. यह तुलना इसलिए भी चौंकाती है क्योंकि तेहरान के आसपास हाल के दिनों में सैन्य हमले हुए हैं और कई ऊर्जा प्रतिष्ठानों में आग लगी है, फिर भी वहां की हवा दिल्ली से बेहतर है.

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क्यों ज्यादा खराब है दिल्ली की हवा

विशेषज्ञों के मुताबिक दिल्ली के प्रदूषण का युद्ध या किसी एक घटना से संबंध नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से मौजूद संरचनात्मक कारणों की वजह से है. दरअसल, दिल्ली इंडो गंगेटिक प्लेन में स्थित है, जिसे दुनिया के सबसे प्रदूषित इलाकों में गिना जाता है. राजधानी के आसपास भारी उद्योग, लाखों वाहनों का ट्रैफिक, निर्माण कार्यों की धूल और खेतों में पराली जलाने जैसी गतिविधियां प्रदूषण को लगातार बढ़ाती रहती हैं. 

खासतौर पर पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से बड़ी मात्रा में PM2.5 कण निकलते हैं, जो जहरीले स्मॉग का सबसे बड़ा कारण बनते हैं. मौसम भी इस समस्या को और गंभीर बना देता है. कमजोर हवाएं और तापमान उलटाव (टेम्परेचर इनवर्जन) प्रदूषण को जमीन के करीब ही रोक देते हैं, जिससे दिल्ली-एनसीआर में धुंध और स्मॉग लंबे समय तक बना रहता है.

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कैसी है तेहरान की स्थिति

तेहरान भी पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं है. यहां भी सबसे बड़ा प्रदूषण स्रोत ट्रैफिक है और वाहनों से निकलने वाला धुआं हवा को प्रभावित करता है. हालांकि तेहरान के आसपास बड़े पैमाने पर पराली जलाने जैसी गतिविधियां नहीं होतीं और न ही उत्तरी भारत के मैदानों जैसा घना इंडस्ट्रियल एरिया वहां मौजूद है. इसी वजह से वहां पृष्ठभूमि प्रदूषण स्तर अपेक्षाकृत कम रहता है.

बता दें कि हालिया जंग के दौरान ईरान में तेल भंडारण केंद्रों पर हमलों और आग लगने की खबरें आईं, जिससे कुछ लोगों ने आशंका जताई थी कि इससे पूरे क्षेत्र की हवा पर असर पड़ेगा. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तरी भारत में हाल में जो धुंध देखी गई, वह ईरान से उठे धुएं की वजह से नहीं बल्कि थार रेगिस्तान और बलूचिस्तान क्षेत्र से आई धूल के कारण थी.

विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली के 2 करोड़ से अधिक लोगों के लिए स्वच्छ हवा की लड़ाई किसी युद्धक्षेत्र में नहीं बल्कि नीतियों, तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग के जरिए ही जीती जा सकती है. जब तक ट्रैफिक, उद्योग, निर्माण धूल और कृषि पद्धतियों से जुड़े प्रदूषण स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होता, तब तक दिल्ली की हवा में सुधार एक बड़ी चुनौती बना रहेगा.

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