सुप्रीम कोर्ट ने संदेसरा बंधुओं से जुड़े ₹9,800 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले को सभी पक्षों द्वारा स्वीकार किए गए समझौते के बाद बंद कर दिया है. इस फैसले के बाद उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही भी रद्द कर दी गई है.
अपने आदेश में अदालत ने कहा कि संदेसरा बंधुओं के खिलाफ आगे की कार्यवाही जारी रखने का कोई खास उद्देश्य नहीं रह जाता. स्टर्लिंग बायोटेक के प्रमोटर नितिन और चेतन संदेसरा से जुड़े इस मामले को ₹5,111.43 करोड़ के भुगतान और शेष ₹4,689 करोड़ के समझौते के बाद बंद कर दिया गया.
इस फैसले के साथ ही उनके खिलाफ सभी आपराधिक मामलों को समाप्त कर दिया गया है. संदेसरा बंधुओं और उनकी कंपनी के खिलाफ दर्ज एफआईआर में ₹5,383 करोड़ की राशि का उल्लेख था. आरोपियों ने सीधे ₹3,507 करोड़ का भुगतान किया.
इसके अलावा ₹1,192 करोड़ की वसूली परिसमापन (लिक्विडेशन) के जरिए हुई. इसके बाद 13 अप्रैल 2026 को ₹45,70,522 का डिमांड ड्राफ्ट जमा किया गया. अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार कुल ₹5,111.43 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समझौते के बाद आगे की कार्यवाही से कोई ठोस लाभ नहीं होगा, इसलिए आपराधिक मामलों को बंद करना उचित है. संदेसरा बंधुओं पर आरोप था कि उन्होंने भारतीय बैंकों से भारी कर्ज लिया और 2017 में देश छोड़कर फरार हो गए, जिसके बाद उन्हें भगोड़ा और आर्थिक अपराधी घोषित किया गया.
बैंकों ने संकेत दिया कि इस समझौते के जरिए वे अपनी बकाया राशि की वसूली कर सकते हैं. 2025 के अंत में सामने आए इस समझौते ने बकाया राशि के बड़े हिस्से के भुगतान के बाद आपराधिक मामलों को बंद करने का रास्ता साफ किया.
₹9,800 करोड़ की वसूली
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट समाधान मामलों में से एक के तहत नितिन संदेसरा के केस को भी बंद कर दिया, जिसमें ₹9,800 करोड़ की वसूली शामिल है. स्टर्लिंग बायोटेक मामले में ₹9,800 करोड़ की संपत्तियां मुक्त (अनलॉक) हुई हैं, जिससे यह भारत के कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे व्यापक वित्तीय समाधान में से एक बन गया है.
अरबपति उद्योगपति नितिन जे. संदेसरा और उनके समूह द्वारा किया गया यह भुगतान भारत की बैंकिंग व्यवस्था के लिए एक बड़ा सकारात्मक कदम माना जा रहा है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज शुरुआती एफआईआर में ₹5,383 करोड़ के डिफॉल्ट का आरोप लगाया गया था, लेकिन समय के साथ समूह की वित्तीय स्थिति की समीक्षा में भुगतान और सॉल्वेंसी की दिशा में प्रयास सामने आए.
कार्यवाही के दौरान संदेसरा समूह ने सीधे ₹3,507 करोड़ ऋणदाताओं के समूह को ट्रांसफर किए. इसके अतिरिक्त ₹1,192 करोड़ की वसूली परिसमापन प्रक्रिया के जरिए हुई.
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम समझौता राशि की पुष्टि की. 17 दिसंबर 2025 के अनुपालन आदेश में अदालत ने कुल राशि ₹51,11,43,36,390 (लगभग ₹5,111.43 करोड़) दर्ज की. कुल वसूली को मिलाकर यह राशि इसी के करीब पहुंचती है.
बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट से ₹5,100 करोड़ जारी करने की मांग की थी, जो स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड और उसकी समूह कंपनियों से जुड़े समझौते का हिस्सा है. कार्यवाही अंतिम चरण में तब पहुंची जब अदालत को बताया गया कि औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए ₹45.70 लाख की शेष राशि जमा की जानी है. यह भुगतान 13 अप्रैल 2026 को कर दिया गया, जिसके बाद समझौते के तहत कोई बकाया दायित्व नहीं बचा.
संजय शर्मा