सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने जा रही है जिनमें असम के मुख्यमंत्री समेत कई राज्यों के सत्ताधारी नेताओं पर नफरत भरे भाषण देने के आरोपों को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है. इन याचिकाओं में कहा गया है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के बयान संविधान की भावना और अदालत के निर्देशों के विपरीत देखे जा रहे हैं और अब न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक हो गया है.
एक याचिका शिक्षाविद हिरन गोहैन की ओर से दायर की गई है जिसमें कथित टिप्पणी और गोली चलाने से जुड़े एक वीडियो के आधार पर अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल गठित करने की मांग की गई है.
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इस वीडियो में हिमंता सरमा नजर आ रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल भी हुआ. वहीं अन्य याचिकाओं में कुछ राजनीतिक दलों ने भी शिकायत की है कि अलग अलग राज्यों के मुख्यमंत्री (पुष्कर सिंह धामी, योगी आदित्यनाथ, हिमंता सरमा) सार्वजनिक मंचों से ऐसे बयान दे रहे हैं जिन्हें विशेष समुदायों के खिलाफ बताया जा रहा है.
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुलिस और प्रशासन को ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए थी, क्योंकि अदालत पहले ही इस तरह के मामलों में स्पष्ट दिशा निर्देश दे चुकी है. इसके बावजूद कार्रवाई न होने को लेकर चिंता जताई गई है.
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याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि जिन लोगों ने संविधान की शपथ लेकर पद संभाला है, उनके बयानों को उसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए और अगर उल्लंघन हुआ है तो कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए.
बताया गया है कि मामले की सुनवाई एक पीठ के सामने सूचीबद्ध है जिसमें देश के मुख्य न्यायाधीश के साथ अन्य न्यायाधीश शामिल रहेंगे. सुनवाई के दौरान अदालत यह देख सकती है कि आरोपों की प्रकृति क्या है और क्या किसी स्वतंत्र जांच या अन्य कदम की आवश्यकता है.
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