सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को भारत में प्रवेश दिलाने के आरोप में शामिल एक व्यक्ति को जमानत दे दी है. जस्टिस बागची ने कहा कि किसी मामले में यह संकेत मिल सकता है कि सीमा पार आवाजाही अवैध गतिविधियों के लिए है, लेकिन केवल सीमा पार आवाजाही होने से यह दावा नहीं किया जा सकता कि यह किसी आतंकी समूह से जुड़ी है.
उन्होंने आगे कहा कि आरोपी 10 साल से अधिक समय से बेंगलुरु में रह रहा है. जांच में किसी आतंकवादी समूह से संबंध होने का कोई संकेत नहीं मिला है.
बता दें, याचिकाकर्ता पर आरोप है कि वह एक बांग्लादेशी नागरिक है, जो बांग्लादेश और म्यांमार से भारत में मानव तस्करी में शामिल एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा है. उसे 7 नवंबर 2023 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में है.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम आरोपी की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाएंगे लेकिन जमानत देंगे.
भारत में स्थायी निवास नहीं
आरोपी के सह-आरोपी ने भी जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और उसे मई 2025 में जमानत मिल गई थी. लेकिन दोनों मामले अलग बताए जा रहे हैं. इस मामले में याचिकाकर्ता का भारत में स्थायी निवास नहीं है, इसलिए उसे कड़ी शर्तों के साथ जमानत पर रिहा किया जा सकता है.
शर्त यह है कि याचिकाकर्ता को अपने निवास स्थान का पता स्थानीय एनआईए कार्यालय में प्रस्तुत करना होगा. एनआईए पते की जांच करेगी और मकान मालिक का बयान भी दर्ज करेगी.
याचिकाकर्ता को हर शनिवार एनआईए में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी, जब तक कि बैंगलुरु में मौजूद एनआईए का सर्वोच्च अधिकारी उसे छूट न दे दे.
अवैध घुसपैठ पर सख्त एक्शन
देशभर में अवैध घुसपैठ के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी गई है. जांच एजेंसियों का फोकस उन संगठित सिंडिकेट्स पर है, जो बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश दिलाने, ठहराने और उन्हें फर्जी दस्तावेज दिलाने में मदद कर रहीं है. केंद्र सरकार ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ से जुड़े मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने के हाथों में सौंपी है. हाल ही में घुसपैठ का मुद्दा काफी चर्चा का विषय बना हुआ है.
अनीषा माथुर