उद्योगपति अनिल अंबानी को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने अनिल अंबानी और उनकी कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें RCom के बैंक खातों को ‘धोखाधड़ी’ (Fraud) घोषित करने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसमें खातों को फ्रॉड मानने पर मिली अंतरिम राहत को रद्द कर दिया गया था. ये मामला ₹40,000 करोड़ से अधिक की कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन जजों की पीठ ने अनिल अंबानी की याचिका खारिज करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को भी बरकरार रखा, जिसमें एकल पीठ द्वारा दी गई अंतरिम राहत को रद्द कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब बैंकों के लिए खातों का फ्रॉड क्लासिफिकेशन की अनुमति देने वाले हाईकोर्ट के फैसले का रास्ता साफ हो गया है.
साथ ही कोर्ट ने राहत की अवधि को आगे बढ़ाने से साफ मना कर दिया है. कोर्ट ने हाईकोर्ट को लंबित दीवानी मुकदमे को तेजी से निपटाने का निर्देश भी दिया है.
शीर्ष अदालत ने इस मामले की जांच में जुटी केंद्रीय एजेंसियों के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं. मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) की उदासीनता और अनिच्छा पर नाराजगी जताई थी. कोर्ट ने एजेंसियों को फटकार लगाते हुए जांच में तेजी लाने के संकेत दिए थे.
₹40,000 करोड़ से ज्यादा की घोखाधड़ी
बता दें कि अनिल अंबानी की कंपनी RCom और उसकी सहायक कंपनियों पर बैंकों के साथ ₹40,000 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं. लोन अकाउंट के फ्रॉड क्लासिफिकेशन में शामिल होने से बचने के लिए अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. कोर्ट के रुख से स्पष्ट है कि वित्तीय गड़बड़ियों के मामलों में अब कोई रियायत नहीं दी जाएगी.
संजय शर्मा