सबरीमाला मामले में सुनवाई पूरी, 9 जजों की पीठ ने रिजर्व किया फैसला, 16 दिनों तक चली बहस

सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संवैधानिक पीठ ने सबरीमाला मामले की 16 दिन तक सुनवाई पूरी कर ली है. इस मामले में आठ संवैधानिक और कानूनी बिंदुओं पर निर्णय लिया जाएगा.

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सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच सुनवाई पूरी कर चुकी है सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच सुनवाई पूरी कर चुकी है

संजय शर्मा / सृष्टि ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:56 PM IST

सुप्रीम कोर्ट में जारी सबरीमाला मामले की सुनवाई गुरुवार को पूरी हो गई. कुल 16 दिन तक 9 जजों की बड़ी बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और 16वें दिन पीठ की ओर से सुनवाई पूरी होने की घोषणा की गई. सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संवैधानिक पीठ ने सबरीमाला मामले पर पांच जजों की पीठ के फैसले पर दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर ये सुनवाई की. इसके साथ ही चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई में संविधान पीठ ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है. इस मामले में पीठ आठ कानूनी और संवैधानिक बिंदुओं पर निर्णय करेगी.

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1) क्या न्यायालय के पास समीक्षा याचिका में किसी विधि संबंधी प्रश्न को उच्च पीठ के समक्ष संदर्भित करने की शक्ति है?

2) क्या कोई व्यक्ति जो किसी धार्मिक संप्रदाय या धार्मिक समूह से संबंधित नहीं है, जनहित याचिका दायर करके उस धार्मिक संप्रदाय या धार्मिक समूह की किसी प्रथा पर सवाल उठा सकता है?

3) भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 में उल्लिखित धार्मिक प्रथा के संबंध में न्यायिक समीक्षा का दायरा और सीमा क्या है?

4) भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के अंतर्गत 'नैतिकता' शब्द का दायरा और विस्तार क्या है और क्या इसमें संवैधानिक नैतिकता को शामिल किया गया है?

5) भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का दायरा और सीमा क्या है?

6) भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत व्यक्तियों के अधिकारों और भारत के संविधान के अनुच्छेद 26 के अंतर्गत धार्मिक संप्रदायों के अधिकारों के बीच क्या परस्पर संबंध है?

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7) क्या भारत के संविधान के अनुच्छेद 26 के अंतर्गत किसी धार्मिक संप्रदाय के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अलावा, भारत के संविधान के भाग III के अन्य प्रावधानों के अधीन हैं?

8) भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 (2) (ख) में प्रयुक्त अभिव्यक्ति “हिंदुओं के वर्ग” का क्या अर्थ है?

बता दें कि यह मामला सिर्फ सबरीमाला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ कई धार्मिक-सामाजिक मुद्दे भी जुड़े हुए थे. सबरीमाला मुद्दे के साथ कई मामलों के लिए हो रही यह बहस 'धर्म बनाम कानून' की बन चुकी थी. नौ जजों की बेंच बनाने के लिए साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के लिए सात सवाल भी तय किए थे. 

क्या थे सात सवाल?

पहला सवाल- भारत के संविधान के आर्टिकल 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का दायरा और इसकी सीमा क्या है?

दूसरा सवाल- आर्टिकल 25 के तहत व्यक्तियों के अधिकारों और आर्टिकल 26 के तहत धार्मिक संप्रदायों के अधिकारों के बीच पारस्परिक संबंध क्या है?

तीसरा सवाल- क्या आर्टिकल 26 के तहत धार्मिक संप्रदायों के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अतिरिक्त संविधान के भाग III के अन्य प्रावधानों के अधीन भी हैं? 

चौथा सवाल- आर्टिकल 25 और 26 में शामिल ‘नैतिकता’ शब्द का दायरा और सीमा क्या है, और क्या इसमें संवैधानिक नैतिकता भी शामिल है?

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पांचवां सवाल- आर्टिकल 25 में शामिल धार्मिक प्रथाओं के संबंध में न्यायिक समीक्षा का दायरा और सीमा क्या है?

छठवां सवाल- आर्टिकल 25(2)(b) में शामिल “हिंदुओं के वर्ग” (Sections of Hindus) अभिव्यक्ति का क्या अर्थ है?

सातवां सवाल- क्या कोई व्यक्ति जो किसी धार्मिक संप्रदाय या समूह से जुड़ा हुआ नहीं है, उस संप्रदाय या समूह की किसी प्रथा या परंपरा को जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से चुनौती दे सकता है?

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