एक पेड़ की सालाना कीमत 74,500 रुपये, SC की बनाई समिति का आकलन

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक कमेटी ने पेड़ों की कीमत और उसे तय करने के मानकों पर अपनी एक रिपोर्ट दी है. चीफ जस्टिस द्वारा अब इस रिपोर्ट पर टिप्पणी की गई है.

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पेड़ों की कीमत पर सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की रिपोर्ट (फाइल) पेड़ों की कीमत पर सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की रिपोर्ट (फाइल)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 11:56 AM IST
  • सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की विशेष रिपोर्ट
  • पेड़ों की कीमत तय करने के मानक

आखिर एक पेड़ की कीमत क्या होती है? किसी पेड़ का दाम तय करने का आधार क्या है? इन सवालों का जवाब जानने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ वक्त पहले एक कमेटी का गठन किया था, जिसकी रिपोर्ट अब सामने आ गई है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के मुताबिक, किसी भी एक पेड़ की कीमत 74 हजार 500 रुपये प्रति सालाना हो सकती है और हर साल बीतने के साथ ही उसकी कीमत में ये राशि जुड़ जाती है.

दरअसल, पश्चिम बंगाल में पांच रेलवे ओवर ब्रिज को बनाने के लिए 300 पेड़ काटने की जरूरत थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा पेड़ों के मूल्यांकन के लिए कमेटी का गठन किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, इन पेड़ों की कीमत करीब 2.2 अरब रुपये है.

, कमेटी के अनुसार, किसी भी पेड़ की कीमत बाजार में लकड़ी के दाम के अलावा उसके द्वारा दिए जा रहे ऑक्सीजन, कंपोस्ट, सुविधा और उसकी उम्र के आधार पर ही तय किया जा सकता है. पेड़ की कीमत अगर 74 हजार 500 रुपये सालाना है, तो उसमें ऑक्सीजन की कीमत 45 हजार, उर्वरकों की कीमत 20 हजार और बाकी लड़की की कीमत होगी.  

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वैसे तो इस कमेटी ने अपनी ये रिपोर्ट एक साल पहले ही दी थी, लेकिन बुधवार को चीफ जस्टिस एस.ए. बोबडे ने इसपर कमेंट किया. चीफ जस्टिस ने सुझाया कि अगर किसी भी रेल या रोड प्रोजेक्ट की कीमत तय की जाती है, तो उस दौरान काटे जाने या हटाए जाने वाले पेड़ों की कीमत भी तय होनी चाहिए और उसे प्रोजेक्ट की राशि में शामिल किया जाना चाहिए.

बंगाल में जिन रेलवे प्रोजेक्ट को लेकर 300 पेड़ काटने की बात कही जा रही है, वो भारत सरकार के सेतु भारतम मेगा प्रोजेक्ट का हिस्सा है. इसी कीमत करीब 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक है. जिन पेड़ों को लेकर रिपोर्ट तैयार हुई है उनकी उम्र 100 साल तक मानी गई है और उसी के आधार पर कीमत तय हुई है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई इस कमेटी में पर्यावरण से जुड़े कई एक्सपर्ट शामिल थे. सर्वोच्च अदालत ने अपनी टिप्पणी में सरकार को सलाह दी कि उन्हें भविष्य के प्रोजेक्टों को ध्यान रखते हुए ये भी कोशिश करनी चाहिए कि पर्यावरण को नुकसान ना हो और पेड़ों को ना काटा जाए. 

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