धर्मांतरण विरोधी कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब

देश के विभिन्न राज्यों में लागू धर्मांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता पर अब सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आएगा. शीर्ष अदालत ने इन कानूनों को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़ दिया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे तीन जजों की विशेष बेंच को सौंपने का निर्णय लिया है.

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मामले पर तीन जजों की बेंच करेगी फैसला (File Photo: PTI) मामले पर तीन जजों की बेंच करेगी फैसला (File Photo: PTI)

सृष्टि ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों को नोटिस जारी किया है. बेंच ने निर्देश दिया कि इस मामले से जुड़ी सभी समान याचिकाओं को एक साथ टैग किया जाए. केंद्र और राज्यों को अपने जवाबी हलफनामे दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया गया है. 

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकारों ने जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए ये कानून बनाए हैं और उनका जवाब करीब-करीब तैयार है. मामले के महत्व को देखते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि अब इस पर तीन जजों की बेंच एक निश्चित तारीख पर सुनवाई करेगी. 

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कई राज्यों में इन कानूनों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है, जिससे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है.

सॉलिसिटर जनरल और याचिकाकर्ताओं ने क्या दलीलें दी?

कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से गुजारिश किया कि कई याचिकाएं लंबित हैं और मामला राज्यों की विधायी शक्तियों से जुड़ा है, इसलिए सभी को एक साथ सुना जाना चाहिए. दूसरी तरफ, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील देते हुए कहा कि ओडिशा और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों के कानूनों को पहले चुनौती नहीं दी गई थी, लेकिन अब कई राज्यों में इन कानूनों के जरिए लोगों को परेशान किया जा रहा है. कोर्ट ने इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए नोटिस जारी करने का फैसला किया.

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जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते की मोहलत

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों को अपना साझा जवाबी हलफनामा (Common Counter) दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया है. इसके बाद, अगर याचिकाकर्ता कोई प्रत्युत्तर (Rejoinder) देना चाहते हैं, तो उन्हें एक हफ्ते का एक्स्ट्रा वक्त मिलेगा. कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं को जल्द पूरा किया जाए, जिससे मामले की मेरिट पर बहस शुरू हो सके.

तीन जजों की बेंच करेगी फैसला

मामले की संवैधानिक जटिलता और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े पहलुओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे तीन जजों की बेंच के पास भेजने का फैसला किया है. कोर्ट का मानना है कि राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों का देशव्यापी असर है, इसलिए एक डीटेल्ड और हाई लेवल जुडिशियल रिव्यू जरूरी है. सभी पक्षों को अब एक तय तारीख पर अपनी आखिरी दलीलें पेश करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है.

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