EXCLUSIVE: ‘संविधान समझे बिना बयान देना आसान’, प्रियंका गांधी पर स्मृति ईरानी का पलटवार

स्मृति ईरानी ने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए डिलिमिटेशन जरूरी है और सभी दलों को राजनीति छोड़कर इस मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए. प्रियंका की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कि संवैधानिक प्रक्रिया को समझे बिना ऐसी बातें करना आसान है.

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महिला आरक्षण पर स्मृति ईरानी का विपक्ष को सीधा चैलेंज दिया (Photo: PTI) महिला आरक्षण पर स्मृति ईरानी का विपक्ष को सीधा चैलेंज दिया (Photo: PTI)

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:05 PM IST

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है. महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण को अगले लोकसभा चुनाव में लागू करना. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि देश की 46 करोड़ से ज्यादा महिला वोटर्स का मुद्दा है.

देश में 50 करोड़ से ज्यादा महिलाएं वर्किंग पॉपुलेशन का हिस्सा हैं. सामाजिक और आर्थिक योगदान में महिलाएं कभी पीछे नहीं रही हैं, तो संसद राजनीतिक भागीदारी में क्यों पीछे रहे?

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पहली लोकसभा में सिर्फ 4 फीसदी महिलाएं थीं, आज करीब 13 फीसदी हैं. क्या यह पर्याप्त है? नहीं. अगर डिलिमिटेशन नहीं होगा, तो इसे लागू करना संभव नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उदारता दिखाई है. विपक्ष बार-बार कहता रहा है कि महिला आरक्षण हमने शुरू किया. अब जब मौका आया है, तो उन्हें समर्थन देना चाहिए. अगर वे सिर्फ हेडलाइन हंटिंग या क्रेडिट की राजनीति कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री ने कहा - पूरा क्रेडिट ले लीजिए, लेकिन बिल पास कराइए.

सदन में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा है कि इसे अभी सरकार को लागू कर देना चाहिए. प्रियंका के बयान पर रिएक्ट करते हुए स्मृति ने कहा कि संवैधानिक मर्यादाओं को समझे बिना ऐसी बातें करना आसान है. बिना डिलिमिटेशन और कांस्टीट्यूएंसी विड्रॉ किए आरक्षण लागू करना संभव नहीं. अगर ऐसा करेंगे तो पुरुषों के अधिकार का सवाल उठेगा. इसलिए सरकार का प्रस्ताव संविधान के दायरे में है.

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अगर विपक्ष नहीं मानता तो प्लान-B क्या है?

स्मृति ईरान ने कहा कि सरकार ईमानदारी से 2029 तक इसे लागू करना चाहती है. प्रधानमंत्री को भरोसा है कि कोई भी दल महिलाओं के खिलाफ नहीं खड़ा होगा. जब यह बिल पहली बार पास हुआ था, तब सर्वसम्मति थी. आज भी प्रधानमंत्री सभी दलों से एक स्वर में समर्थन की अपील कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार ने सदन में आश्वासन दिया है कि किसी राज्य या समुदाय के साथ अन्याय नहीं होगा. जनगणना को पूरी तरह अलग नहीं किया गया है. यह धारणा गलत है. सरकार ने इस पर स्पष्ट रुख रखा है और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन होगा.

उन्होंने कहा कि राजनीति अगर सिर्फ परंपरागत सीटों तक सीमित रहेगी तो देश का विकास नहीं होगा. सरकार ने स्पष्ट कहा है कि कोई अन्याय नहीं होगा और संसदीय परंपराओं का पालन होगा.

क्या यह सब पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ा राजनीतिक कदम है?

स्मृति ईरान ने कहा कि भारत में हर समय कहीं न कहीं चुनाव होते हैं. ऐसा कोई समय नहीं होगा जब विपक्ष कहे कि आज सही दिन है. अगर विपक्ष को लगता है कि यह मुद्दा चुनावी है, तो बंगाल में महिला मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें इसका सबसे ज्यादा समर्थन करना चाहिए.

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आज देश देख रहा है कि कौन महिला आरक्षण के साथ है और कौन इसके खिलाफ. अगर कोई इसका विरोध करता है, तो देश की जनता उसे पहचान लेगी.

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