'जमात-ए-इस्लामी जैसी संस्थाएं खतरनाक', मुस्लिम संस्था ने युवाओं को दी चेतावनी

समस्था ने जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी विचारधाराओं के खिलाफ मुस्लिम युवाओं को चेताया है. संस्था ने उन्हें धार्मिक राष्ट्रवाद और राजनीतिक इस्लाम की गुमराह करने वाली बातों से बचने की सलाह दी है. समस्था ने दावा किया है कि ये विचारधाराएं इस्लाम के शांति संदेश और भाईचारे को नुकसान पहुंचा रही हैं.

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समस्था ने कट्टरपंथी विचारधारा को लेकर चेतावनी दी है. (Photo: ITG) समस्था ने कट्टरपंथी विचारधारा को लेकर चेतावनी दी है. (Photo: ITG)

शिबिमोल

  • तिरुवनंतपुरम,
  • 09 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:23 PM IST

केरल की प्रमुख मुस्लिम संस्था 'समस्था' ने एक प्रस्ताव के जरिए जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी विचारधाराओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. संस्था का कहना है कि ऐसी विचारधाराएं इस्लाम के शांति के संदेश और पूर्वजों के दिखाए गए भाईचारे के रास्ते को बर्बाद कर रही हैं.

समस्था ने मुस्लिम युवाओं को आगाह किया है कि वो 'धार्मिक राष्ट्रवाद' और 'राजनीतिक इस्लाम' जैसी गुमराह करने वाली बातों में न आएं. समस्था का ये बयान तब आया है जब हाल ही में कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन ने कहा था कि वो आगामी चुनावों में जमात-ए-इस्लामी का समर्थन लेंगे, क्योंकि अब वो 'इस्लामी गणराज्य' बनाने की बात नहीं करते.

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बता दें कि समस्था संस्था सीधे तौर पर मुस्लिम लीग (IUML) से जुड़ी हुई है, जो कांग्रेस की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है. अब जब समस्था ने ही जमात-ए-इस्लामी को 'खतरनाक' बता दिया है, तो कांग्रेस और यूडीएफ के लिए उनका समर्थन लेना मुश्किल नजर आ रहा है.

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जमात-ए-इस्लामी पर लगाए आरोप

समस्था ने प्रस्ताव में विशेष रूप से 'मौदूदवादी' (जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक की विचारधारा) सोच पर हमला किया है. समस्था का आरोप है कि ये लोग इमोशनल बातें करके युवाओं को मुख्यधारा से अलग कर रहे हैं. संस्था ने मीडिया के एक वर्ग पर भी सवाल उठाए हैं जो ऐसी अलगाववादी सोच को बढ़ावा देते हैं.

समस्था ने अपील की है कि मुस्लिम समुदाय को अपनी 'अह्लुस-सुन्नत वल-जमात' (सूफी और पारंपरिक सुन्नी इस्लाम) की विरासत को बचाकर रखना चाहिए, जो दोस्ती पर आधारित है. उन्होंने सभी से कट्टरपंथी ताकतों का वैचारिक रूप से मुकाबला करने को कहा है.

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जुमे की नमाज के लिए ब्रेक की मांग

बता दें कि समस्था' ने अपने शताब्दी सम्मेलन में शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षाओं का समय जुमे की नमाज (शुक्रवार दोपहर) के मुताबिक तय किए जाने की मांग भी की है. एक प्रस्ताव में संस्था ने कहा कि नमाज के वक्त कक्षाएं या परीक्षाएं आयोजित करना छात्रों और शिक्षकों के साथ अन्याय है.

समस्था ने सरकार से अपील की है कि संविधान के धार्मिक स्वतंत्रता के तहत शुक्रवार दोपहर को नियमित ब्रेक दिया जाए. 

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