छत्तीसगढ़ स्टेट इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रेवेन्यू इंस्पेक्टर डिपार्टमेंटल एग्जाम पेपर लीक मामले में आरोपी अधिकारियों वीरेंद्र जाटव और हेमंत कौशिक के खिलाफ पहली चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी है. जांच में सामने आया है कि यह महज एक पेपर लीक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'सिंडिकेट' था जिसने करोड़ों का खेल खेला.
जांच में पता चला कि 7 जनवरी 2024 को होने वाली रेवेन्यू इंस्पेक्टर एग्जाम में एग्जाम की तारीख से पहले ही कॉम्प्रोमाइज किया गया था. कहा जा रहा है कि क्वेश्चन पेपर लीक किया गया था और पैसे के बदले चुने हुए कैंडिडेट्स को दिया गया था. अधिकारियों को शक है कि 100 से ज्यादा कैंडिडेट्स को लीक हुआ क्वेश्चन पेपर मिल गया था.
जांच में डिजिटल सबूत मिले जिनसे पता चला कि आरोपियों ने कई चैनलों के जरिए पेपर बांटा और बदले में पैसे लिए. अलग-अलग जिलों से कैंडिडेट्स को कथित तौर पर रायपुर लाया गया और होटल, फार्महाउस और रिसॉर्ट में ठहराया गया, जहां उन्हें परीक्षा से पहले सवाल पढ़ने और याद करने की इजाजत थी.
जांच करने वालों ने यह भी बताया कि कैंडिडेट्स को कथित तौर पर सबूत मिटाने के लिए परीक्षा में बैठने से पहले लिखे हुए नोट्स नष्ट करने के लिए कहा गया था. आरोपियों के रिश्तेदार और साथी कथित तौर पर रहने की व्यवस्था करने और लीक हुए मटीरियल तक पहुंच दिलाने में शामिल थे.
डिजिटल सबूत से केस मजबूत
जांच के मुताबिक, डिजिटल रिकॉर्ड और CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) के एनालिसिस से पता चला कि परीक्षा से एक रात पहले कैंडिडेट्स और आरोपियों की लोकेशन मैच कर रही थी. इससे पता चला कि वे होटलों और दूसरी जगहों के बीच अक्सर आते-जाते थे, जहां कथित तौर पर सवाल-जवाब उपलब्ध कराए गए थे.
जांच करने वालों को एक साथ रहने वाले कैंडिडेट्स के ग्रुप के बीच जवाब देने के पैटर्न और स्कोरिंग ट्रेंड में भी समानताएं मिलीं, जिससे यह आरोप और पक्का होता है कि एक ही आंसर की का इस्तेमाल किया गया था.
आगे की जांच चल रही है
EOW अधिकारियों ने कहा कि फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और लीक को अंजाम देने से जुड़े हो सकने वाले और अधिकारियों, उम्मीदवारों और बिचौलियों की पहचान करने के लिए जांच अभी भी जारी है. संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत जांच जारी है और सामने आने वाले सबूतों के आधार पर और कार्रवाई हो सकती है.
सुमी राजाप्पन