तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी उन नेताओं में हैं जिन्होंने डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण बिल के खिलाफ सबसे पहले दक्षिण राज्यों की ओर से आवाज उठाई है. इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने मुख्यमंत्री रेड्डी से बातचीत की है. मुख्यमंत्री रेड्डी ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के नाम पर सीटों की संख्या बढ़ाकर कुछ राज्यों को फायदा पहुंचाने और संविधान में बदलाव की कोशिश की जा रही थी.
आइए जानते हैं कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और राजदीप सरदेसाई के बीच क्या-क्या बातचीत हुई.
रेवंत रेड्डी ने कहा कि यह न विपक्ष की जीत है, न सरकार की हार की. यह जनता की जीत है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत साफ नहीं थी और महिला आरक्षण के नाम पर सीटें बढ़ाकर कुछ राज्यों को फायदा देने और संविधान बदलने की कोशिश की जा रही थी.
सीट बढ़ाने के फॉर्मूले पर आपत्ति
जब उनसे पूछा गया कि अगर हर राज्य में 50 फीसदी सीटें बढ़ाई जाएं तो दिक्कत क्या है, उन्होंने कहा कि राजनीति में प्रतिशत नहीं, नंबर मायने रखते हैं. केरल में 20 सीटें हैं और यूपी में 80. अगर 50% बढ़ेगा तो केरल 30 और यूपी 120 हो जाएगा. इससे अंतर और बढ़ जाएगा. उन्होंने कहा कि इससे छोटे और दक्षिणी राज्य कमजोर हो जाएंगे.
उत्तर बनाम दक्षिण का मुद्दा
रेवंत रेड्डी ने कहा कि यह उत्तर बनाम दक्षिण का मुद्दा बनाने की कोशिश है. उन्होंने कहा कि अगर जनसंख्या के आधार पर डिलिमिटेशन हुआ तो दक्षिण भारत और कमजोर होगा, क्योंकि वहां आबादी कम है.
आंदोलन की चेतावनी
उन्होंने साफ कहा कि अगर 2026 की जनगणना के बाद डिलिमिटेशन हुआ और दक्षिण को नुकसान हुआ तो आंदोलन होगा. उन्होंने किसान कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि पास होने के बाद भी कानून वापस लिए जा सकते हैं.
यह भी पढ़ें: संसद से सड़क तक टकराव... महिला आरक्षण बिल पर TMC बनाम BJP, ममता बोलीं - बीजेपी का पतन शुरू हो गया
उनका समाधान - लोकसभा फ्रीज, विधानसभा में बदलाव
रेवंत रेड्डी ने अपना मॉडल रखाते हुए कहा कि लोकसभा सीटें 543 पर ही फ्रीज रहें. डिलिमिटेशन सिर्फ विधानसभा में हो. हर राज्य में जनसंख्या के हिसाब से विधानसभा सीटें बढ़ाई जाएं. उन्होंने कहा कि सांसद का काम कानून बनाना है, गली-मोहल्ले की समस्या देखना नहीं.
महिला आरक्षण पर उनका प्रस्ताव
रेवंत रेड्डी ने कहा कि 543 सीटों में ही तुरंत 1/3 आरक्षण लागू करें. 2029 का इंतजार क्यों करना है. विधानसभा में भी तुरंत लागू किया जाए. उन्होंने कहा कि वे खुद तेलंगाना में 119 सीटों में से 40 महिलाओं को देने को तैयार हैं.
कोई पुरुष विरोध नहीं करेगा
जब पूछा गया कि पुरुष सांसद विरोध करेंगे, उन्होंने कहा कि कोई खुलकर विरोध नहीं करेगा. लोकल बॉडी में 50% आरक्षण लागू हो चुका है. वही मॉडल यहां भी लागू किया जा सकता है.
विपक्षी एकजुटता की गारंटी
रेवंत रेड्डी ने कहा कि वे सभी विपक्षी दलों को एकजुट कर सकते हैं. सोमवार को ही बिल पास करवाने की गारंटी देते हैं.
बीजेपी के आरोपों का जवाब
बीजेपी के महिला विरोधी आरोप पर उन्होंने कहा कि महिलाओं को वोट का अधिकार कांग्रेस ने दिया. महिला प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, स्पीकर कांग्रेस ने दिए. कांग्रेस ने महिलाओं को नेतृत्व दिया. उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसने अपने संगठन में महिलाओं को उतना स्थान नहीं दिया.
ओपन डिबेट की चुनौती
रेवंत रेड्डी ने कहा कि वे इस मुद्दे पर खुली बहस के लिए तैयार हैं और बीजेपी का कोई भी नेता सामने आए.
हाइब्रिड मॉडल का प्रस्ताव
उन्होंने अपने सुझाव को दोहराया कि 50 फीसदी सीटें जनसंख्या के आधार पर हो और 50 फीसदी जीडीपी और विकास के आधार पर. उन्होंने कहा कि सरकार को पहले स्टेक होल्डर्स से चर्चा करनी चाहिए.
दक्षिण भारत के कमजोर होने का डर
मुख्यमंत्री रेड्डी ने कहा कि अगर प्रोफेशनल बढ़ोतरी हुई तो उत्तर भारत को ज्यादा फायदा होगा. बीजेपी दक्षिण में कमजोर है, इसलिए वहां का असर कम करना चाहती है.
कांग्रेस बनाम बीजेपी - दक्षिण को प्रतिनिधित्व
रेवंत रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस के समय दक्षिण को महत्वपूर्ण मंत्रालय और पद मिलते थे. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी में दक्षिण को उतना प्रतिनिधित्व नहीं मिलता.
यह भी पढ़ें: 'विपक्ष की एकजुटता ने देश का भविष्य बचा लिया', प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद बोले रेवंत रेड्डी
महिला वोट बैंक पर सवाल
जब उनसे पूछा गया कि क्या 2029 चुनाव महिला वोट बैंक पर लड़े जाएंगे. तो मुख्यमंत्री रेड्डी ने कहा कि बीजेपी भावनात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है. लेकिन अगर कानून गलत होगा तो महिलाएं भी उसका विरोध करेंगी. उन्होंने उदाहरण दिया कि ममता बनर्जी ने भी इस बिल का विरोध किया.
यह सत्ता पाने की कोशिश है
उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल 400 से ज्यादा सीटें जीतकर सत्ता मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है.
राजदीप सरदेसाई