पंजाब-हिमाचल में एंट्री टैक्स पर टकराव, कटौती के दावे के बीच बॉर्डर पर हंगामा

पंजाब-हिमाचल सीमा पर एंट्री टैक्स विवाद भड़क गया है. दरों में कटौती के सरकारी ऐलान के बावजूद जमीनी स्तर पर राहत न मिलने से यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों में नाराजगी बढ़ गई. प्रदर्शन और नाकेबंदी ने हालात को तनावपूर्ण बना दिया है.

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 31 मार्च को एंट्री टैक्स दरों में कटौती का ऐलान किया था. (File Photo: ITG) मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 31 मार्च को एंट्री टैक्स दरों में कटौती का ऐलान किया था. (File Photo: ITG)

कमलजीत संधू / असीम बस्सी

  • चंडीगढ़,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:45 PM IST

पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच एंट्री टैक्स को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है. हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा 31 मार्च को एंट्री टैक्स दरों में आंशिक कटौती की घोषणा के बावजूद जमीनी हकीकत अलग है. बुधवार को सीमा पर यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों ने आरोप लगाया कि उनसे अब भी बढ़ी हुई दरों के हिसाब से ही वसूली की जा रही है.

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इसको लेकर पंजाब-हिमाचल सीमा पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू हो गए. पंजाब के संयुक्त मोर्चे ने करीब तीन घंटे तक सीमा को जाम कर दिया. इसमें किसान संघ, टैक्सी यूनियन और ट्रक यूनियन समेत कई संगठन शामिल थे. दरअसल, आर्थिक तंगी से जूझ रहे हिमाचल ने 55 टोल प्लाजा के जरिए टोल टैक्स बढ़ाया था.

इसके जरिए करीब 185 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बनाई गई थी. इसके तहत हिमाचल प्रदेश टोल अधिनियम में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए संशोधन करते हुए एंट्री टैक्स और टोल दरों को अपडेट किया गया. नए ढांचे के तहत हिमाचल के बाहर के वाहनों पर भारी बढ़ोतरी की गई थी. कार और हल्के वाहनों (12 सीट तक) के लिए टोल दर को बढ़ाकर 130 रुपए कर दिया गया था. 

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हालांकि, स्थानीय निवासियों को राहत देने के लिए टोल प्लाजा के 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वालों को छूट का प्रावधान रखा गया. लेकिन कटौती की घोषणा के बावजूद, गरमोड़ा टोल प्लाजा समेत कई एंट्री प्वाइंट पर यात्रियों ने शिकायत की है कि उनसे अब भी पुरानी बढ़ी हुई दरें ही वसूली जा रही हैं. इससे नाराज लोगों ने हिमाचल सरकार पर धोखा देने का आरोप लगाया.

ऊना में एक यात्री परमजीत सिंह ने कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि टोल टैक्स 170 रुपए से घटाकर 70 रुपए किया जाएगा, लेकिन इसके उलट अब 100 रुपए वसूले जा रहे हैं. एक अन्य यात्री सुभाष ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि टैक्स कभी घटता है तो कभी बढ़ता है, जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है. बिलासपुर में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन देखने को मिले. 

कई लोगों का कहना था कि दरों में कटौती की आधिकारिक अधिसूचना अब तक सभी टोल बूथ तक नहीं पहुंची है, जिसकी वजह से यह भ्रम की स्थिति बनी हुई है. इस पूरे विवाद पर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि NHAI के नियमों के तहत एक तकनीकी बदलाव किया गया है, जिसमें पहले की दो कैटेगरी (5 सीटर और 6-12 सीटर) वाहनों को मिलाया गया है.

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उन्होंने बताया कि अब 5 सीटर कारों से 100 रुपए वसूले जाएंगे, जो पहले 70 रुपए थे. 6 से 12 सीटर वाहनों के लिए शुल्क 130 से घटाकर 100 रुपए कर दिया गया है. अन्य वाहनों जैसे बस, ट्रक और ट्रैक्टर पर पुरानी दरें ही लागू रहेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि वो इस मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से बात करेंगे और जोर दिया कि विरोध प्रदर्शनों की कोई आवश्यकता नहीं है.

वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यदि हिमाचल सरकार ने टैक्स वापस ले लिया है तो यह अच्छी बात है, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो पंजाब भी जवाबी कदम उठा सकता है. उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हिमाचल में उनकी ही सरकार है, फिर भी वे इस मुद्दे को क्यों नहीं उठा रहे हैं. 

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