पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को सतलोक आश्रम के प्रमुख संत रामपाल को देशद्रोह के मामले में जमानत दे दी है. हालांकि, कोर्ट ने जमानत की शर्तें और रिहाई की प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं की है. कोर्ट के इस फैसले का रामपाल के अनुयायियों ने स्वागत किया है, क्योंकि वह लंबे वक्त से उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे.
दरअसल, ये मामला साल 2014 के उस विवादास्पद घटनाक्रम से जुड़ा हुआ है. जब अदालत द्वारा दिए गए आदेशों की अवहेलना (contempt of court) के मामले में पेश न होने के कारण पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए आश्रम की घेराबंदी की थी. इस दौरान पुलिस और रामपाल के अनुयायियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस संघर्ष में 6 लोगों की मौत हो गई थी. इस पूरे घटनाक्रम ने देशभर का ध्यान खींचा था। अंततः पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने में सफल रही थी, जिसके बाद से वे जेल में ही हैं.
इस मामले में रामपाल को आजीवन कारावास की सजा मिली हुई थी और वह लगभग 11 साल, 4 महीने और 20 दिन से जेल में बंद है. फिलहाल वह हिसार केंद्रीय जेल में है. अब देशद्रोह वाले मामले में कोर्ट से राहत मिल गई है. उनके वकीलों ने लंबे समय से जेल में रहने और मामले के तथ्यों को आधार बनाकर जमानत की अपील की थी. हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद उनकी रिहाई से जुड़ी अन्य कानूनी प्रक्रियाओं और शर्तों का विवरण आना अभी बाकी है. इस फैसले के बाद उनके अनुयायियों में खुशी की लहर दौड़ गई है.
अमन भारद्वाज