लोकसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने मजाकिया अंदाज में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर एक तंज कसा, जिसे सुनकर वह भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए. वायनाड सांसद ने कहा कि कांग्रेस महिला सांसदों के लिए आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन बहस इस पर नहीं बल्कि इस तथ्य पर है कि इस विधेयक में राजनीति की बू आ रही है.
प्रियंका गांधी ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण का कदम वास्तव में केंद्र की एनडीए सरकार का पॉलिटिकल ट्रंप कार्ड है, जिसके जरिए वह चुनावों में लाभ लेना चाहती है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले के संबोधन का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा महिलाओं के अधिकारों की हिमायती रही है. प्रियंका ने बोलते-बोलते अमित शाह की ओर देखा, वह मुस्कुरा रहे थे.
इस पर प्रियंका गांधी की भी हंसी छूट गई. उन्होंने हंसते हुए कहा, 'हंस रहे हैं... गृह मंत्री जी हंस रहे हैं. पूरी तैयारी बना रखी है आपने. आज चाणक्य अगर आज जिंदा होते तो वो भी चौंक जाते, आपकी कुटिलता की दाद देते.' उनके इतना कहने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से जमकर ठहाके लगे. प्रियंका गांधी और अमित शाह भी हंस रहे थे. कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव आयोग, न्यायपालिका और मीडिया जैसी संस्थाओं पर दबाव बना रही है.
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वायनाड सांसद ने यह भी पूछा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता. उन्होंने कहा, 'अगर यह संविधान संशोधन विधेयक पारित हो गया, तो इस देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा.' प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण के इस कदम का हमेशा से विरोध होता रहा है.
नेहरू का जिक्र कर प्रियंका का BJP पर तंज
उन्होंने कहा, 'मैं इस विषय पर थोड़ा ऐतिहासिक संदर्भ देना चाहती हूं, क्योंकि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इस पर काफी बात की कि इसे किसने रोका और 30 वर्षों तक यह फैसला कैसे टलता रहा. हो सकता है कि सत्तापक्ष के मेरे सहयोगियों को यह पसंद न आए, लेकिन इसका ऐतिहासिक आधार भी नेहरू नाम के एक व्यक्ति से जुड़ा है. घबराइए नहीं, ये वो नेहरू (जवाहरलाल नेहरू) नहीं हैं जिनसे आप कतराते हैं. उनके पिता मोतीलाल नेहरू ने 1928 में एक रिपोर्ट तैयार की थी और उसे कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सामने पेश किया था, जिसमें 19 मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया था.'
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महिला आरक्षण पर पिता राजीव को क्रेडिट
प्रियंका गांधी ने आगे कहा, '1931 में सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में कराची में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, जहां यह प्रस्ताव पारित किया गया. यहीं से महिलाओं के समान अधिकार हमारे देश की राजनीति का हिस्सा बने. उसी समय वन वोट, वन सिटिजन, वन वैल्यू का सिद्धांत भी स्थापित हुआ.' उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देशों में इस अधिकार के लिए 150 वर्षों तक इंतजार और संघर्ष करना पड़ा, जबकि भारत में महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने की दिशा में यह एक अनूठा कदम था. प्रियंका ने कहा कि नगरपालिकाओं और पंचायतों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान सबसे पहले उनके दिवंगत पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने सदन में पेश किया था.
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