प्रियंका गांधी का भाषण, अमित शाह की तिरछी मुस्कान... संसद के वो 24 मिनट जो बताते हैं कि लौट रही है हल्की-फुल्की नोंक झोंक

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ तीखा रुख अपनाया. उन्होंने भाजपा पर महिला आरक्षण का श्रेय लेने का आरोप लगाया और विधेयक में ओबीसी वर्ग के अधिकारों को खत्म करने का आरोप लगाया.

Advertisement
प्रियंका गांधी ने परिसीमन बिल पर अमित शाह पर पलटवार किया प्रियंका गांधी ने परिसीमन बिल पर अमित शाह पर पलटवार किया

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर लंबी चर्चा हुई.पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ वायनाड से कांग्रेस की सांसद और महासचिव प्रियंका ने एकतरफा मोर्चा संभाला.माहौल हल्का रखा .यही नहीं भाषण में कई पंच लाइन ऐसी थीं कि पीएम मोदी और शाह भी मुस्कुराते दिखे..लेकिन भाषण में प्रियंका की मैच्योरिटी साफ दिखाई दे रही थी.प्रियंका जब बोल रही थीं तब शाह या बीजेपी के किसी भी नेता ने कोई भी टिप्पणी नहीं की और सभी बहुत ध्यान से नेता को सुनते दिखे..

Advertisement

महिला आरक्षण पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि 'इस बात में कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महिलाओं के संरक्षण और आरक्षण के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और आगे भी खड़ी रहेगी'

पीएम मोदी के भाषण पर प्रियंका गांधी ने दिया जवाब
नीली सुनहरे बॉर्डर वाली साड़ी में प्रियंका बीच बीच में मुस्कुरा रही थीं और पीएम मोदी और शाह को अपने निशाने पर भी ले रही थीं.प्रियंका ने शुरुआत से ही पीएम मोदी और बीजेपी को आड़े हाथों रखा.वह बोलीं- 'प्रधानमंत्री की आज की टिप्पणियों से ऐसा लगा जैसे भाजपा ही महिला आरक्षण की प्रणेता और सबसे बड़ी समर्थक रही है.

उनके पूरे भाषण का विषय भी यही था, भले ही उन्होंने यह दावा किया कि वह इसका कोई श्रेय नहीं लेना चाहते' लेकिन 2018 में राहुल गांधी ने पीएम मोदी को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने गुजारिश की कि महिला आरक्षण बिल 2019 में लागू हो जाना चाहिए.

Advertisement

प्रियंका बोलीं कि 'मुझे लगता है पीएम मोदी राहुल गांधी का यहां मजाक तो उड़ा लेते हैं लेकिन घर जाकर उनकी बातों पर गौर करते हैं' 

प्रियंका गांधी ने दिलाई महिलाओं की छठी इंद्री की याद
पीएम मोदी के भाषण का उल्लेख करते हुए प्रियंका ने कहा कि 'पीएम मोदी के भाषण से ऐसा लगा कि भाजपा ही महिला आरक्षण के चैंपियन प्रस्तावक और सबसे बड़े समर्थक रहे हैं. इनके पूरे भाषण में यही बात थी जबकि ये कह रहे थे कि इन्हें इसका श्रेय नहीं चाहिए.  लेकिन पॉज लेते हुए प्रियंका ने एकबार फिर महिलाओं के सिक्स सेंस के बारे में याद दिलाया और कहा कि 'कोई भी महिला ये बतला देगी कि बार बार बहकाने वाले पुरुषों को महिलाएं झट से पहचान लेती हैं .थोड़ी सावधानी बरत लीजिए.पकड़े जाएंगे'.

राहुल गांधी के पत्र की दिलाई याद
राहुल गांधी के उस पत्र की ओर ध्यान दिलाना चाहती हूं जिसे पढ़ने के कुछ वर्षों बाद, अंततः जब आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 2023 में सर्वसम्मति से इस अधिनियम को पारित किया, तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपनी विचारधारा के अनुरूप इसका पूरा समर्थन किया." इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में डट के खड़ी है. और खड़ी रहेगी पर  'आज की चर्चा महिला आरक्षण पर है ही नहीं.

Advertisement

इस बिल से आ रही है राजनीतिक बू- प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी ने कहा कि इसमें लिखा है कि महिला आरक्षण 2029 तक लागू होना चाहिए. इसे लागू करने के लिए 'लोकसभा सदस्यों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ानी पड़ेगी,मतलब सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 तक बढ़ाई जाएगाी'. इसके लिए परिसीमन आयोग बनाया जाएगा, जो सीटों को बढ़ाने के लिए काम करेगा. राजनीतिक बू, जिसका जिक्र पीएम ने किया वह इसमें पूरी तरह मिली हुई है.'

प्रियंका गांधी ने कहा '2023 में जो विधेयक पारित कराया गया था, उसमें दो चीजें थीं, जो इसमें नहीं हैं. उसमें नई जनगणना और परिसीमन का जिक्र था. अब क्या हो गया. मन बदल गया. पुराने आंकड़ों के आधार पर क्यों आगे बढ़ना चाह रही सरकार. जल्दबाजी क्यों'. जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, सभी वर्गों को उचित हिस्सा नहीं मिल सकता है.

उन्होंने कहा कि 'पीएम ने हल्के में बोल दिया कि इस वर्ग और उस वर्ग के बारे में बाद में देखेंगे. ये हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह बड़ी संख्या है.यह पूरे वर्ग का संघर्ष है'. इसे तकनीकी मुद्दा बताकर पल्ला झाड़ लिया. पीएम इस विधेयक के जरिए ओबीसी वर्ग का हक छीनना चाहते हैं'.

किसी का हक छीनकर नहीं चलाया जा सकता है देश
उन्होंने कहा कि, इस देश को किसी एक का हक छीन कर नहीं चलाया जा सकता. इसमे संसद का 50 फीसदी विस्तार बताया गया है, लेकिन परिवर्तन के नियम के बारे में पूरे विधेयक में कोई शर्त नहीं है.  प्रियंका गांधी ने कहा कि '1971 की जनगणना के आधार पर परिसीमन पर रोक लगाई गई थी. अब इसे पूरी तरह बदलने की कोशिश की जा रही है. इस बड़े परिवर्तन के लिए भारत में पूरी प्रक्रिया बनी हुई है, लेकिन वे इस प्रक्रिया का पालन नहीं करना चाहते.

Advertisement

'कुछ प्रदेशों की ताकत कम कर के लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाकर अपनी पार्टी की मजबूती तय की जा रही है. इन्होंने पूरी योजना बना ली है'.''गृह मंत्री हंस रहे हैं, पूरी योजना बना रखी है. यदि आज चाणक्य जिंदा होते तो चौंक जाते आपकी राजनीतिक कुटिलता पर'गृह मंत्री जी हंस रहे हैं, मेरी बात से सहमत हैं'

प्रियंका गांधी ने कहा कि, 'अचानक प्रदेश में चुनाव के दौरान बैठक बुलाओ, कोई सर्वदलीय बैठक न करो. विधेयक का प्रारूप एक दिन पहले ही जारी करो. मीडिया में चर्चा शुरू कराओ. बेचारे मोदीजी इतना बड़ा कदम उठाने वाले हैं ऐसी बातें चलाई जाती हैं. यह कर कर के विपक्ष को धर्मसंकट में डालने की कोशिश की जाती है. एक तरफ महिला आरक्षण लाना और दूसरी तरफ काट पीट करने की स्वतंत्रता, पूरे ढांचे को बदलने की स्वतंत्रता और ओबीसी वर्ग के हक को खत्म करने की स्वतंत्रता हासिल करना. यह सत्ता बनाए रखने का एक कमजोर बहाना है'.

प्रियंका ने सवाल उठाया कि 'सरकार मौजूदा 543 सीटों में ही 33 फीसदी आरक्षण का एलान क्यों नहीं कर देती. इससे आपका काम भी हो जाएगा और काला टीका (विपक्ष का विरोध) भी काम आ जाएगा. मैं प्रधानमंत्री महोदय जी को कहना चाहती हूं कि अगर वे ईमानदारी से इस कदम को उठाते तो पूरा सदन उनके साथ खड़े होकर इसका समर्थन करता'. 'प्रधानमंत्री जी अगर महिलाओं का सम्मान करते हैं तो उनका राजनीतिक इस्तेमाल न करें'. 

Advertisement

'हम आपके तीनों विधेयकों का विरोध करते हैं'
हम आपके तीनों विधेयकों का सख्त विरोध करते हैं, लेकिन अब भी आप ऐसा निर्णय ले सकते हैं, जो सर्वसम्मति से सदन में पारित हो जाएगा और हमारी नारी शक्ति को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल जाएगा. '1928 में मोतीलाल नेहरू ने एक रिपोर्ट तैयार की थी और उन्होंने 19 मूल अधिकारों की सूची बनाई थी. 1931 में सरदार पटेल की अध्यक्षता में कराची अधिवेशन में इस प्रस्ताव को पारित किया गया और वहीं से महिला का समान अधिकार राजनीति में शामिल हुआ.

 उसी समय वन वोट, वन सिटिजन, वन वैल्यू का सिद्धांत भी हमारी राजनीति में शामिल हुआ.इस सिद्धांत की वजह से देश में महिलाओं को वोट देने का अधिकार आजादी के पहले दिन से मिला, जबकि अमेरिका जैसे देश में इस अधिकार के लिए महिलाओं को 150 साल तक इंतजार करना पड़ा. हमारे देश की राजनीतिक व्यवस्था में महिला आरक्षण लागू करना भी ऐसा ही अनोखा कदम था' 'पंचायतों और नगरपालिकाओं में 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान भी कांग्रेस की सरकार ने राजीव गांधी के नेतृत्व में सदन पटल पर पहली बार पेश किया, लेकिन उस वक्त यह प्रावधान पारित नहीं हो पाया'

पीएम मोदी ने आधा सच ही बोला- प्रियंका गांधी
'आज प्रधानमंत्री ने इस बात का जिक्र तो किया, लेकिन हमेशा की तरह उन्होंने केवल आधा सच बोला उन्होंने सदन को बताया कि विरोध हुआ था, लेकिन स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि वास्तव में विरोध किसने किया था. तो हकीकत  यह है कि वह आप (भाजपा) ही थे, जिन्होंने इसका विरोध किया था' इसके कुछ वर्षों बाद, पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने संसद में इस कानून को पारित किया और इसे लागू किया.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement