अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत दौरे पर दिल्ली पहुंचे और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस मीटिंग में दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार और नई तकनीक जैसे अहम मुद्दों पर बात हुई. यह दौरा क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हो रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक और रणनीतिक मायने इससे कहीं बड़े बताए जा रहे हैं.
फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद यह पहली उच्चस्तरीय बैठक थी, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री भारत दौरे पर आए हैं. विदेश मंत्री बनने के बाद यह मार्को रुबियो का पहला भारत दौरा माना जा रहा है.
मार्को रुबियो भारत के तीन प्रमुख शहरों - कोलकाता, जयपुर और आगरा का दौरा करेंगे. इसे अमेरिका की ओर से भारत के साथ संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
दौरे की शुरुआत दिल्ली से हुई, जहां अमेरिकी विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक के बाद मार्को रुबियो जयपुर और आगरा के लिए रवाना होंगे. वहां वे कई संस्थानों और प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे. इसके बाद 26 तारीख को होने वाली क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे, जहां कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी.
अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ मुलाकात पर क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी?
अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ मुलाकात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, 'भारत और अमेरिका दुनिया की भलाई के लिए आगे भी मिलकर काम करते रहेंगे.'
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बैठक में क्या-क्या हुआ?
इस अहम बैठक में भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई. करीब एक घंटे चली इस बैठक में सुरक्षा, व्यापार, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे कई अहम मुद्दे शामिल रहे.
दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया. चर्चा में यह भी शामिल रहा कि भारत और अमेरिका किस तरह मिलकर सुरक्षा ढांचे को मजबूत कर सकते हैं और व्यापारिक साझेदारी को नई गति दे सकते हैं.
बैठक में क्रिटिकल टेक्नोलॉजी को लेकर सहयोग बढ़ाने पर भी बातचीत हुई. इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 'फ्रीडम ऑफ नेविगेशन' यानी समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के साझा प्रयासों पर चर्चा की गई.
रविवार को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता का एक और दौर होगा. साथ ही क्वाड देशों की बैठक और भारत की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
भारत-अमेरिका बैठक में मिडिल ईस्ट संकट पर चर्चा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक में मिडिल ईस्ट के संकट पर भी चर्चा हुई. रुबियो ने बैठक में साफ कहा कि अमेरिका ईरान को वैश्विक ऊर्जा बाजार को 'बंधक' नहीं बनाने देगा.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और बाजार की स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद भारत की ऊर्जा जरूरतों को विविध बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
मार्को रुबियो बोले - इंडो पैसिफिक रणनीति में भारत अमेरिका की नीति का सबसे अहम स्तंभ
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में वॉशिंगटन की रणनीति का अहम आधार हैं. उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली आधिकारिक बैठक क्वाड देशों के साथ हुई थी और अब अगली क्वाड बैठक भारत में होना दिल्ली की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को दिखाता है.
अमेरिकी विदेश मंत्री ने गिनाईं भारत-अमेरिका साझेदारी की उपलब्धियां
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 20 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य अभ्यासों के जरिए सुरक्षा साझेदारी भी लगातार गहरी हुई है.
प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका आने का न्योता
प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका आने का निमंत्रण दिया गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश का हिस्सा है.
बैठक में और कौन-कौन हुआ शामिल?
बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभल भी मौजूद रहे. वहीं अमेरिका की ओर से भारत में अमेरिकी राजदूत भी बैठक में शामिल हुए.
गीता मोहन / प्रणय उपाध्याय