9 साल बाद इजरायल जाएंगे PM मोदी... सुरक्षा और तकनीक पर होगा बड़ा समझौता

भारत और इजरायल के बीच कूटनीतिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इजरायल का दौरा करेंगे, जहां दोनों देश सुरक्षा, रक्षा औद्योगिक सहयोग और नई संवेदनशील तकनीकों के सह-विकास पर कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे.

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भारत और इजरायल के बीच एफटीए पर लग सकती है मुहर (File Photo: ITG) भारत और इजरायल के बीच एफटीए पर लग सकती है मुहर (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:44 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नौ साल के लंबे अंतराल के बाद इजरायल का दौरा करने वाले हैं. इस यात्रा के दौरान भारत और इजरायल सुरक्षा के क्षेत्र में रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने और आतंकवाद विरोधी चुनौतियों का सामना करने के लिए नई तकनीकों के सह-उत्पादन और सह-विकास पर समझौता करेंगे. इजरायल में भारत के राजदूत रूवेन अजर के मुताबिक, इजरायली प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के पहले चरण की वार्ता को अंतिम रूप देने के लिए भारत पहुंचेगा. 

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इजरायल सरकार ने पहले ही अकादमिक सहयोग, नवाचार, कृषि, वित्त, ऊर्जा और खनन जैसे कई क्षेत्रों के लिए करोड़ों डॉलर आवंटित करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है. 

दोनों देशों के नेताओं के बीच होने वाली यह मुलाकात आने वाले महीनों में लंबित द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने और रणनीतिक साझेदारी को और ज्यादा मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी.

सुरक्षा और तकनीक में बढ़ेगी साझेदारी

भारत और इजरायल का ध्यान अब सिर्फ रक्षा उपकरणों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है. इजरायली राजदूत रूवेन अजर ने स्पष्ट किया कि अब दोनों देश मिलकर नई और ज्यादा संवेदनशील तकनीकों का निर्माण करेंगे. इसमें मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन्स के लिए जरूरी आधुनिक उपकरणों का सह-विकास शामिल है. इस सहयोग को विस्तार देने के लिए शिखर वार्ता के दौरान कई अहम रक्षा समझौतों पर साइन किए जाएंगे.

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FTA के पहले चरण पर वार्ता तेज

मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर इजरायली डेलिगेशन अगले कुछ हफ्तों में भारत में वार्ता करेगा. राजदूत अजर का मानना है कि भारत ने यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे प्रमुख खिलाड़ियों के साथ समझौते किए हैं, इसलिए अब इस वार्ता को जल्द खत्म करने पर ध्यान दिया जा सकेगा. नेताओं के आशीर्वाद से आने वाले महीनों में बातचीत पूरी करने का टार्गेट है. इजरायल ने कृषि और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए भी बड़ा फंड आवंटित किया है.

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