PM मोदी ने फोटोग्राफर रघु राय को दी श्रद्धांजलि, बोले- भारत की जीवंतता को लेंस से कैद किया

दिग्गज फोटोग्राफर रघु राय का 83 साल की उम्र में निधन हो गया. वो कैंसर से जूझ रहे थे. उन्होंने अपनी तस्वीरों के जरिए दशकों तक देश की दृश्य स्मृति को आकार दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है.

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Prime Minister Narendra Modi paid tribute, calling him a “creative stalwart” whose work captured India’s vibrancy with rare depth and sensitivity. Prime Minister Narendra Modi paid tribute, calling him a “creative stalwart” whose work captured India’s vibrancy with rare depth and sensitivity.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:55 PM IST

भारत की दृश्य स्मृति को अपने कैमरे में सहेजने वाले महान फोटोग्राफर रघु राय का एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह 83 साल के थे और कैंसर से जूझ रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए रचनात्मक दिग्गज बताया. उन्होंने कहा कि रघु राय ने अपने लेंस के माध्यम से भारत की जीवंतता को कैद किया. उनकी फ़ोटोग्राफी में असाधारण संवेदनशीलता, गहराई और विविधता थी. 

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प्रधानमंत्री ने रघु राय के निधन को फोटोग्राफी और संस्कृति की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति बताया है. उनके निधन पर राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत से शोक संदेशों की बाढ़ आ गई. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने भारत की आत्मा को अपने काम में उतारा. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्होंने आम लोगों की खुशियों और दुखों को हमेशा के लिए तस्वीरों में उकेर दिया.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वो न केवल एक बड़े नाम थे, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व भी थे. वहीं फ़ोटोग्राफ़र आदित्य आर्य ने कहा कि रघु राय की तस्वीरें दर्शकों को घटना के बीचों-बीच ले जाती थीं. उनके बेटे फोटोग्राफर नितिन राय ने बताया कि दो साल पहले उनके पिता को प्रोस्टेट कैंसर का पता चला था, जो पेट में फैल गया और बाद में दिमाग तक पहुंच गया.

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लेंस के पीछे रघु राय का जीवन

18 दिसंबर 1942 को पंजाब के झांग (अब पाकिस्तान) में जन्मे रघु राय ने 23 साल की उम्र में फोटोग्राफी की दुनिया में कदम रखा. वो साल 1966 में 'द स्टेट्समैन' से मुख्य फ़ोटोग्राफ़र के तौर पर जुड़े. छह दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने भारत के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास को अपने कैमरे में कैद किया. 1972 के बांग्लादेश संकट से लेकर 1984 की भोपाल गैस त्रासदी तक कवर किया.

रघु राय ने 'संडे' और 'इंडिया टुडे' जैसे प्रमुख प्रकाशनों के साथ काम किया. उनके द्वारा खींची गई तस्वीरें टाइम, लाइफ, द न्यूयॉर्क टाइम्स और द न्यू यॉर्कर जैसे अंतरराष्ट्रीय अखबारों में भी प्रकाशित हुआ. प्रसिद्ध फ़ोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसन के शिष्य रहे रघु राय ने इंदिरा गांधी, दलाई लामा, मदर टेरेसा, सत्यजीत रे, हरिप्रसाद चौरसिया और बिस्मिल्लाह खान जैसी हस्तियों को अपने कैमरे में कैद किया.

यादों को आकार देती तस्वीरें

रघु राय की तस्वीरें केवल दृश्य नहीं थीं, बल्कि समाज की गहराई को सामने लाने वाली दस्तावेज थीं. भोपाल गैस त्रासदी की उनकी तस्वीरें आज भी लोगों को झकझोर देती हैं. एक तस्वीर में खुली आंखों वाला बच्चा दिखता है, जिसकी नजर बेजान है. उनका मानना था कि फोटोग्राफी दृश्य इतिहास बनाती है. उन्होंने कहा था, ''इतिहास लिखा और फिर से लिखा जा सकता है, लेकिन दृश्य दोबारा नहीं दिखता.''

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साल 1972 में बांग्लादेश युद्ध की कवरेज के लिए उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया. इसके अलावा उन्हें 'फोटोग्राफर ऑफ द ईयर' और 2009 में फ्रांस का प्रतिष्ठित 'ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स'’ सम्मान भी मिला. उन्होंने UNESCO और वर्ल्ड प्रेस फोटो जैसी संस्थाओं की जूरी में भी काम किया. अपनी मृत्यु के समय वो 57वीं किताब पर काम कर रहे थे. 

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