चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने उत्तराखंड में भारत-चीन सरहद के नजदीक आजतक से एक्सक्लूसिव बातचीत में सीडीएस के तौर पर अपने कार्यकाल पर खुलकर बात की. उत्तराखंड में चीन सरहद पर स्थित हर्षिल और माणा गांव के दौरे के दौरान सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि अब हमें अगले सिंदूर की तैयारी करनी है.
उन्होंने बताया जियो पॉलिटिक्स तेजी से बदल रही है, तकनीक बदल रही है. तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना होगा. ऑपरेशन सिंदूर का साल पूरा होने जा रहा है.
जनरल अनिल चौहान ने कहा कि "ऑपरेशन सिंदूर एक यूनिक ऑपरेशन था. जो पुरानी और नई डोमेन के साथ लड़ा गया. ये ऑपरेशन जल, थल, वायु और साइबर, स्पेस में कई मोर्चों पर लड़ा गया.
भविष्य के युद्ध को देखते हमें सिचुएशनल अवेयरनेस पर जोर देना होगा. साथ ही सेनाओं के बीच इंटीग्रेशन को बढ़ाना होगा."
थियेटर कमांड को लेकर सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि "मेरा मानना थियेटर कमांड भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर सिस्टम है. तीनों सेनाओं के बीच थियेटर कमांड को लेकर जो थोड़े बहुत मतभेद थे उन्हें दूर कर लिया गया है. अब हम जल्द इसको लेकर आगे बढ़ेंगे."
चौहान ने कहा कि "हम जिस न्यू नार्मल की बात करते हैं उसमें हमें 24 घंटे और 365 दिन तैयार रहना होगा. दुश्मन के खिलाफ बल प्रयोग के लिए हमें हमेशा तैयार रहना होगा."
सीडीएस अनिल चौहान ने बताया कि हर्षिल और माणा में म्यूज़ियम बनाने से इन सीमांत इलाकों से लोग जुड़ेंगे. लोगों को देश की सीमाओं के बारे में पता चले जो सीमाओं की रक्षा करते हैं उनके बारे में पता चले.
उन्होंने आगे कहा कि चीन सरहद पर 1962 की जंग में विस्थापित नेलांग और जड़ांग गांव को सांस्कृतिक और पर्यटक गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है.
धराली और हर्षिल की आपदा पर बोले चौहान
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने बताया कि धराली और हर्षिल आपदा बहुत बड़ी थी. स्थानीय लोगों ने पुनर्निर्माण के मामले में सेना जो मदद मांगी है, मैंने उसका जायजा लिया है. हम उसको पूरा करेंगे.
हमने देहरादून में एक थिंक टैंक भी बनाया है जिसका मकसद लोगों में सैन्य भावना को बढ़ावा. इसके साथ की राष्ट्रीयता को बढ़ावा देना और साथ पर्यावरण सुरक्षा को भी आगे बढ़ाना है.
जनरल अनिल चौहान ने कहा कि "आज गांव जाकर मुझे बहुत ख़ुशी हुई. मुझे लगा मैं अपनी जड़ों से जुड़ा. एक साथ अपने रिश्तेदारों से मिलकर मैं बहुत भावुक हूं."
मंजीत नेगी