Exclusive: 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली सालगिरह, जयपुर में रक्षा मंत्री करेंगे हाईलेवल मीटिंग

'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली सालगिरह के मौके पर जयपुर में होने वाले तीन दिवसीय संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, CDS और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल होंगे. इस दौरान ऑपरेशन सिंदूर और मौजूदा वैश्विक सुरक्षा हालात पर मंथन होगा.

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इस मीटिंग में तीनों सेनाओं के प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. (File Photo: ITG) इस मीटिंग में तीनों सेनाओं के प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. (File Photo: ITG)

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:16 PM IST

'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली सालगिरह को इस बार सरकार बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी में है. 7 मई को इस सैन्य कार्रवाई के एक साल पूरे होने के मौके पर देश की सैन्य और रणनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी देखने को मिलेगा. इसी कड़ी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 6 से 8 मई तक जयपुर में होने वाले तीन दिवसीय संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करेंगे.

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इंडिया टुडे/आजतक को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, इस हाईलेवल मीटिंग में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, तीनों सेनाओं के प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने सुरक्षा चिंताओं को गहरा कर दिया है.

सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन के दौरान न केवल 'ऑपरेशन सिंदूर' की रणनीतिक समीक्षा की जाएगी, बल्कि देश और दुनिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर भी व्यापक चर्चा होगी. इस दौरान 'ऑपरेशन सिंदूर' पर एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई जाएगी, जिसमें इस ऑपरेशन में शामिल सैनिक और अधिकारी अपने अनुभव साझा करेंगे.

दरअसल, इस सम्मेलन का समय बेहद सोच-समझकर तय किया गया है. 7 मई को ही 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू हुआ था. यह ऑपरेशन पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में लॉन्च किया गया था, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी. इसके जवाब में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर बुरी तरह तबाह कर दिया था.

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सरकार ने उस समय इन हमलों को केंद्रित, नपा-तुला और तनाव न बढ़ाने वाला बताया था. खास बात यह रही कि इस कार्रवाई में पाकिस्तान की सैन्य सुविधा को निशाना नहीं बनाया गया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलन बनाए रखने का संदेश भी गया. पिछले साल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को नई रणनीतिक सोच का प्रतीक बताया था. 

रक्षा मंत्री ने कहा था कि यह ऑपरेशन इस बात का संकेत है कि भारत अब किसी भी आतंकी हमले का जवाब अपनी शर्तों पर देने में सक्षम है. इसे उन्होंने नए भारत का रक्षा सिद्धांत करार दिया था, जिसमें दृढ़ संकल्प और साहस दोनों शामिल हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि यह ऑपरेशन राष्ट्र के साहस और संयम का प्रतीक है. 

भारतीय सेनाओं ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के 9 बड़े आतंकी ठिकानों को बिना नियंत्रण रेखा पार किए और बिना नागरिकों को नुकसान पहुंचाए नष्ट किया था. इस सम्मेलन में तीनों सेनाओं के प्रमुखों और रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि सरकार इसे एक रणनीतिक अवसर के तौर पर देख रही है. 

इसके जरिए उन संयुक्त सैन्य सिद्धांतों और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान परखा गया था. इनमें M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर और आकाश वायु रक्षा प्रणाली जैसे स्वदेशी और अत्याधुनिक हथियार सिस्टम भी शामिल हैं. इन्होंने इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई थी.

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