'खाना-पीना छोड़िए, टॉयलेट तक नहीं जा पाते...', सैलरी ही नहीं, प्रोटेस्टर्स के सामने ये भी परेशानियां

नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और राजस्थान के भिवाड़ी-अलवर में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों ने सैलरी बढ़ाने, बेहतर भोजन, मोबाइल ले जाने की अनुमति और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. नोएडा में तीन दिनों से जारी विरोध सोमवार को हिंसक रूप ले गया, जिसमें सड़कों पर जाम, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं.

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नोएडा में निजी कंपनियों के वर्कर्स अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए नोएडा में निजी कंपनियों के वर्कर्स अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:59 PM IST

उत्तर प्रदेश के नोएडा से हरियाणा-राजस्थान तक प्राइवेट कंपनियों के कर्मी अपनी मांगों के साथ सड़क पर उतर आए. नोएडा में पिछले तीन दिनों से इस विरोध की आग सुलग रही थी, जो सोमवार को उग्र और हिंसक प्रदर्शन में बदल गई. नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया की तमाम सड़कों पर जाम लग गया और तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं. 

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असंतोष और शोषण की कहानी
उधर, फरीदाबाद, गुरुग्राम और राजस्थान से भिवाड़ी-अलवर में भी प्रदर्शन हो रहे हैं. आजतक की टीम ने ग्राउंड पर उतरकर कर्मियों से उनकी परेशानी और प्रदर्शन की वजह जानने की कोशिश जिस तरह की बातें सामनें आईं वो वाकई चौंकाने और परेशान करनी वाली हैं.

इस प्रदर्शन के पीछे नाराजगी, असंतोष और शोषण की तमाम कहानियां हैं, जो अब तक दबी-छिपी रहीं और आज ब्लास्ट कर गईं. प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने खुलकर कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कई चौंकाने वाले आरोप लगाए.

'कोई बीमार हुआ तो...'
फरीदाबाद के सेक्टर 37 स्थित मदर्सन कंपनी के बाहर, जहां प्रदर्शन हो रहा है, वहां आजतक की टीम पहुंची और प्रदर्शनकारी कर्मियों से बात की. इस दौरान मदर्सन के एक कर्मी अजीत ने बताया कि, हमारी सैलरी पहले 11299 रुपये थी, जो ज्वाइनिंग के बाद से बढ़ी ही नहीं. उन्होंने कहा कि यहां का खाना भी ठीक नहीं है, जबरन ओवर टाइम लगवाई जाती है. अगर किसी वर्कर की तबीयत खराब हो तो ये एंट्री के लिए 10 लोगों के सिग्नेचर चाहिए तब गेटपास मिलेगा.

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अजीत ने कहा कि,  सुबह आते ही मोबाइल फोन छीन कर जब्त कर लिए जाते हैं. हमारे सीनियर हमसे चिल्ला कर बात करते हैं. लड़कियों से भी बहुत बदतमीजी से बात की जाती है. हमारी बेसिक सुविधाएं भी हमें नहीं मिलती है और शिकायतों के लिए कोई सुनवाई नहीं है. 

'घर में कुछ हो जाए तो बात भी नहीं कर सकते'

वहीं एक और कर्मचारी राहुल दुबे ने बताया कि यहां कंपनी में 9000 कर्मी हैं, जिसमें एक शिफ्ट में लगभग 3000 वर्कर काम करते हैं. न तो कंपनी में ढंग का खाना दिया जा रहा है, न तो पानी की व्यवस्था ठीक है, और मोबाइल भी नहीं ले जाने देते हैं. इतनी दूर से हम काम करने आते हैं, अगर हमारे घर में कोई हादसा हो जाए तो हमें वक्त पर पता भी नहीं चल पाता है.

'सैलरी स्लिप भी नहीं मिलती'
जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रदर्शन का बड़ा मुद्दा मोबाइल है? तो उन्होंने कहा- नही, मोबाइल तो एक कारण है. हमारी मांग तो पहले ठीक सैलरी दिए जाने की है. हमारी सैलरी बढ़ाई जाए. ढंग का खाना दिया जाए और काम के दौरान मोबाइल भी साथ ले जाने दिया जाए. कर्मियों ने कहा कि हमें सैलरी स्लिप भी नहीं दी जाती है. सिर्फ उन्हें दी जाती है, जो परमानेंट हैं. 

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'न खाना मिलता है न टॉइलेट की सुविधा'
इस दौरान सीटू (Centre of Indian Trade Unions) के जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने भी कर्मियों के प्रदर्शन का समर्थन किया. उन्होंने सरकार के तय वेज के अनुसार वेतन की मांग की, साथ ही वर्कर्स के लिए काम के घंटे के दौरान खास सुविधाएं  कैंटीन, भोजन, आने-जाने का यात्रा भत्ता, शौचालय आदि की सुविधा दिए जाने की मांग की. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि मैनेजमेंट से अभी कोई बात नहीं हुई है. उन्होंने कहा, जब तक कर्मियों की मांगे पूरी नहीं होंगी ये आंदोलन जारी रहेगा.

'चार-पांच साल हो गए नहीं बढ़ी सैलरी'
प्रदर्शनकारियों में शामिल एक युवती लक्ष्मी ने बताया कि हमारी सैलरी बढ़नी चाहिए. उन्होंने कहा कि सैलरी 20 हजार रुपये होनी चाहिए. अभी हमारी सैलरी 11 हजार रुपये थी, कट कर 9000 आती थी. हमें चार-पांच साल हो गए सैलरी बढ़ाते नहीं है. लोग यहां 9-9 साल से काम कर रहे हैं, उन्हें भी परमानेंट नहीं करते हैं और सैलरी नहीं बढ़ाते हैं. जो नए कर्मी आते हैं तो उनकी सैलरी भी हमारे बराबर होती है. फिर न हमारी सैलरी बढ़ती है और न उनकी. सैलरी बढ़ने के इंतजार में चार-चार, पांच-पांच साल हो जाते हैं. छोटी-छोटी बात पर ये लोग निकालने की धमकी देते हैं.

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'निकालने की धमकी देता है मैनेजमेंट'
ये तो बातें फरीदाबाद के प्रोटेस्टर्स की थीं. नोएडा के कर्मियों ने तो बड़ी कंपनियों की और पोल खोली है. प्रदर्शन कर रही एक महिला कर्मचारी ने आजतक को बताया, हमें 9 से 11 हजार रुपये के बीच सैलरी मिलती है. सालों तक मेहनत करने के बाद भी इसमें कोई खास बढ़ोतरी नहीं होती. अगर ज्यादा आवाज उठाओ तो 200-300 रुपये बढ़ा देते हैं, जैसे कोई बहुत बड़ा एहसान कर दिया हो. 

'कम सैलरी मिलती है रिकॉर्ड में कुछ और ही दिखाते हैं'
एक अन्य महिला कर्मचारी ने कहा, हमसे 10-12 घंटे काम कराया जाता है, लेकिन वेतन सिर्फ 15 हजार मिलता है. ऊपर से जब कोई जांच करने आता है, तो कंपनी वाले रिकॉर्ड में दिखाते हैं कि हमें 25 हजार रुपये मिलते हैं. कर्मचारियों का आरोप है कि कागजों पर सब कुछ सही दिखाया जाता है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. एक कर्मचारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर हम विरोध करें तो मामूली बढ़ोतरी कर दी जाती है, लेकिन असल समस्या जस की तस रहती है.

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