बिहार सीएम नीतीश कुमार ने गुरुवार को ऐलान किया कि वह राज्यसभा चुनाव लड़ेंगे. इसके साथ ही बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले उनके कार्यकाल का अंत हो जाएगा. जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा.
उन्होंने कहा, 'दो दशकों से अधिक समय तक आपने मुझ पर लगातार भरोसा और समर्थन बनाए रखा. उसी भरोसे की ताकत से हमने बिहार और आप सभी की पूरी निष्ठा से सेवा की. आपके विश्वास और सहयोग की ही शक्ति है कि आज बिहार विकास और सम्मान की नई पहचान के साथ सामने खड़ा है.'
नीतीश कुमार ने जताई इच्छा!
नीतीश कुमार ने कहा कि अपने संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वह बिहार विधानसभा के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें. उन्होंने कहा, 'इसी इच्छा के अनुसार इस बार होने वाले चुनाव में मैं राज्यसभा का सदस्य बनने का प्रयास कर रहा हूं.' उन्होंने आगे कहा, 'मैं आपको पूरी ईमानदारी से आश्वस्त करना चाहता हूं कि भविष्य में भी आपसे मेरा संबंध बना रहेगा. विकसित बिहार के निर्माण के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का मेरा संकल्प अडिग रहेगा. राज्य में बनने वाली नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा.'
बिहार... जहां अब तक नहीं रहा बीजेपी का सीएम
2025 के विधानसभा चुनाव में सत्ता पर काबिज एनडीए की बड़ी जीत के बाद नीतीश कुमार के पद छोड़ने से यह लगभग तय माना जा रहा है कि अब मुख्यमंत्री पद पर भाजपा का कोई नेता काबिज हो सकता है. अगर ऐसा होता है, तो बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा. हिंदी पट्टी के राज्यों में बिहार ही अब तक ऐसा राज्य रहा है जहां भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं रहा. बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है और गुरुवार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है. विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए नीतीश कुमार का राज्यसभा के लिए निर्वाचित होना लगभग तय माना जा रहा है.
10 बार बिहार के सीएम पद की शपथ ले चुके हैं नीतीश कुमार
बता दें कि सीएम नीतीश कुमार के लिए राजनीतिक गलियारों में एक जुमला बड़ा आम है. 'किसी की भी सरकार, सीएम नीतीशे कुमार' ऐसा इसलिए क्योंकि वह बिहार में 10 बार सीएम पद की शपथ ले चुके हैं. इस 10 बार की शपथ में ऐसा रहा कि कभी नीतीश की पार्टी सहयोगी पार्टी की 'बड़े भाई' की भूमिका रही तो कभी सिचुएशन ने उन्हें 'छोटे भाई' की भूमिकाओं में रखा. इन दोनों ही भूमिकाओं को का फायदा पर्सनली नीतीश कुमार को खूब हुआ और सत्ता में रहने के दौरान उनका परिचय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा बना रहा.
उनके सीएम पद की दावेदारी से राज्यसभा तक की तैयारी की पूरी क्रोनोलॉजी पर एक नजर डालते हैं.
पहली बार शपथ
साल 2000 विधानसभा चुनाव में न RJD और न ही NDA को स्पष्ट बहुमत मिला था. इसके बावजूद राज्यपाल ने नीतीश कुमार (समता पार्टी–NDA) को सरकार बनाने के लिए बुलाया. उन्होंने 3 मार्च 2000 को पहली बार सीएम पद की शपथ ली. हालांकि, विश्वास मत से पहले ही बहुमत साबित न कर पाने की स्थिति में उन्होंने 10 मार्च 2000 को इस्तीफा दे दिया. ये सरकार सिर्फ 7 दिन चली.
नवंबर 2005 दूसरी बार बने सीएम
फिर 24 नवंबर 2005 को उन्होंने दूसरी बार शपथ ली. असल में फरवरी 2005 के हंग असेंबली के बाद अक्टूबर-नवंबर में दोबारा चुनाव हुए. इन चुनावों में NDA- JDU+BJP को साफ बहुमत मिला. 24 नवंबर 2005 से 24 नवंबर 2010 तक पहली फुल-टर्म NDA सरकार रही. नीतीश की ‘सुशासन बाबू’ और कानून-व्यवस्था में सुधार की छवि इसी दौर में बनी.
JDU_BJP गठबंधन- नीतीश तीसरी बार बनें सीएम
साल 2010 विधानसभा चुनाव में JDU-BJP गठबंधन ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की, नीतीश ने लगातार दूसरी बार NDA सरकार बनाई. हालांकि, 17 मई 2014 को लोकसभा में JDU के बेहद खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए CM पद से इस्तीफा दे दिया. बाद में जीतन राम मांझी CM बने.
2014 में चौथी बार शपथ
2014 में मांझी को CM बनाने के बाद JD(U) में टकराव बढ़ा. पार्टी ने नीतीश को फिर नेता चुना, तब मांझी हटे और नीतीश ने दुबारा शपथ ली. यह शपथ 2015 विधानसभा चुनाव से पहले, एक तरह नीतीश की ‘वापसी’ के रूप में देखी गई.
20 नवंबर 2015 में पांचवीं बार शपथ
2015 के चुनाव में महागठबंधन (JDU+RJD+Congress) को भारी बहुमत मिला. नीतीश ने 20 नवंबर को CM पद की शपथ पांचवीं बार ली. तब उनके साथ तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बने. यह चरण ‘भाजपा-विरोधी’ महागठबंधन और तेजस्वी के उभार का दौर था.
2017 में छठी बार बने सीएम
RJD पर भ्रष्टाचार के आरोपों और डिप्टी CM तेजस्वी पर FIR को लेकर हुई तनातनी के बीच 26 जुलाई 2017 को नीतीश ने बीच में ही महागठबंधन सरकार से इस्तीफा दे दिया. इसके अगले ही दिन 27 जुलाई को BJP के समर्थन से NDA सरकार बनाकर उन्होंने छठी बार CM पद की शपथ ली.
2020 में NDA के साथ रहकर सत्ता पर हुए काबिज
2020 विधानसभा चुनाव में NDA (BJP+JDU+सहयोगी) को 125 सीटें मिलीं. बहुमत हासिल हुआ, लेकिन तब RJD सबसे बड़ी पार्टी रही, लेकिन NDA गठबंधन संख्या में आगे रहा. इस बार JDU की सीटें घटीं और BJP दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, फिर भी NDA ने नीतीश को चेहरा बनाए रखा और इस तरह उन्होंने 7वीं बार शपथ ली.
8वीं बार 2022 में बने सीएम
9 अगस्त 2022 को नीतीश ने फिर NDA (BJP) से रिश्ता तोड़कर महागठबंधन के साथ हाथ मिला लिया. 10 अगस्त 2022 को उन्होंने महागठबंधन सरकार के नेता के रूप में 8वीं बार CM पद की शपथ ली और एक बार फिर तेजस्वी यादव उनके डिप्टी बने.
जनवरी 2024 में फिर से बने सीएम
जनवरी 2024 में नीतीश ने महागठबंधन और INDIA ब्लॉक से नाराज होकर इस्तीफा दिया और दोबारा BJP के नेतृत्व वाले NDA में लौट गए. 28 जनवरी 2024 को राजभवन, पटना में उन्होंने 9वीं बार CM की शपथ ली. इस बार BJP के सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा, दो उपमुख्यमंत्री बने.
नवंबर 2025 में बिहार चुनाव में जीत के बाद बने सीएम
इसके बाद नीतीश कुमार ने नवंबर 2025 में 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. इस दौरान बिहार चुनाव में बीजेपी और जेडीयू की अगुवाई में एनडीए को 202 सीटों का प्रचंड बहुमत मिला था. नीतीश कुमार के शपथ लेते हुए पीएम मोदी ने उन्हें बधाई दी थी. नीतीश ने हाथ पकड़कर उनका अभिवादन स्वीकार किया था. इस तरह नीतीश कुमार 10 बार बिहार के सीएम रह चुके हैं.
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