गुजारा भत्ता 4 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने की मांग, मोहम्मद शमी की पत्नी हसीन जहां की सुप्रीम कोर्ट में गुहार

क्रिकेटर मोहम्मद शमी की पत्नी हसीन जहां ने Supreme Court में याचिका दायर कर घरेलू हिंसा और गुजारा भत्ते के मामलों की सुनवाई कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की है. उन्होंने भरण-पोषण राशि 4 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रतिमाह करने की गुहार भी लगाई है. मामले में नोटिस जारी हुआ है. पूर्व में दर्ज एफआईआर, वारंट और हाईकोर्ट आदेश के बाद विवाद सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

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हसीन जहां ने मामला दिल्ली की अदालत में ट्रांसफर कराने की गुहार लगाईं है. (Photo ITG) हसीन जहां ने मामला दिल्ली की अदालत में ट्रांसफर कराने की गुहार लगाईं है. (Photo ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

क्रिकेटर मोहम्मद शमी की पत्नी हसीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट में तबादला अर्जी दाखिल कर गुहार लगाई है कि घरेलू हिंसा और गुजारा भत्ते की उसकी अर्जियों पर सुनवाई कोलकाता की बजाय दिल्ली की अदालत में कराई जाए. इससे कुछ महीनों पहले ही हसीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट में ही एक याचिका दाखिल कर अपने और बेटी के लिए गुजारा भत्ता 4 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति माह करने की गुहार लगाई थी. उस पर जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने नोटिस जारी कर मोहम्मद शमी और पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब देने को कहा है.

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2014 में हुई थी दोनों की शादी
हसीन जहां के अनुसार उनकी शादी 7 अप्रैल 2014 को इस्लामी परंपराओं के तहत मोहम्मद शमी से हुई थी. 17 जुलाई 2015 को उनकी बेटी का जन्म हुआ. साल 2018 में उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई शुरू की. उनका आरोप था कि शादी के बाद उन्हें और उनकी नाबालिग बेटी को शमी और उनके परिवार की ओर से शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया.

इसी दौरान उन्होंने एक लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसे बाद में एफआईआर के रूप में स्वीकार किया गया. जादवपुर थाने में आईपीसी की धाराओं 498A, 328, 307, 376, 325 और 34 के तहत मामला दर्ज हुआ. इसके अलावा, भरण-पोषण के लिए उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत भी याचिका दायर की.

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2019 में गिरफ़्तारी वारंट जारी
अगस्त 2019 में अलीपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शमी और उनके परिजनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. हालांकि, बाद में सत्र अदालत ने इस वारंट पर रोक लगा दी और यह स्थगन लगभग चार साल तक प्रभावी रहा. जब हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सत्र न्यायालय को निर्देश दिया कि वारंट से जुड़ी कार्यवाही एक महीने के भीतर पूरी की जाए.

पिछले साल कलकत्ता हाईकोर्ट ने शमी को अपनी पत्नी और बेटी को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में हर महीने 4 लाख रुपये देने का आदेश दिया था. हसीन जहां ने इस राशि को पर्याप्त न बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और 10 लाख रुपये प्रतिमाह भत्ता तय करने की मांग की.

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