इजरायल में मोदी, जापान में योगी... दोनों देशों में डिप्लोमेसी से निवेश तक क्या कुछ एजेंडे में है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जहां वे रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करेंगे. वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान में निवेशकों से मिलकर राज्य को वैश्विक निवेश केंद्र बनाने के प्रयास कर रहे हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ दोनों ही इस वक्त विदेश दौरों पर हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ दोनों ही इस वक्त विदेश दौरों पर हैं.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:56 PM IST

भारत की विदेश नीति इस वक्त चर्चा में है. चर्चा में इसलिए, क्योंकि एक तरफ पीएम मोदी और दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी दोनों ही विदेश दौरे पर हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर हैं. वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान का दौरा कर रहे हैं. दोनों नेताओं की यात्राएं अपने-अपने स्तर पर राजनीतिक, रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक नजरिए से बेहद अहम मानी जा रही हैं. एक तरफ भारत-इजरायल की सुरक्षा और रक्षा साझेदारी को नई मजबूती देने की कोशिश है, तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने के प्रयास की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं. 

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नौ साल बाद इजरायल पहुंचे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 और 26 फरवरी को इजरायल के दौरे पर हैं. यह उनका दूसरा इजरायल दौरा है. इससे पहले वे 2017 में इजरायल गए थे. नौ साल बाद हो रही यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिक्स के लिहाज से हालात तेजी से बदल रहे हैं. भारत-इजरायल संबंध रणनीतिक साझेदारी के नए स्टेप में आ चुके हैं.

पीएम मोदी तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे, जहां इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने खुद उनकी आगवानी करेंगे. स्वागत का यही शुरुआती पहला स्टेप ये बताता है कि संबंध सिर्फ फॉर्मेलिटी नहीं है, बल्कि दो राष्ट्राध्यक्षों के बीच आपस में भरोसा और राजनीतिक समझ के लेवल पर व्यक्तिगत विश्वास मजबूत हो चुके हैं.

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अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी इजरायल की संसद नेसेट को संबोधित करने वाले हैं, हालांकि इजरायल के विपक्षी दलों ने उनके संबोधन का बहिष्कार करने की धमकी दी है. इस पर नेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना ने कहा कि अगर विपक्षी सांसद गैरमौजूद रहते हैं तो खाली सीटों को पूर्व सांसदों से भर दिया जाएगा. यह घटनाक्रम बताता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत की भूमिका और उसकी लीडरशिप को लेकर वैश्विक राजनीति में चर्चा और मतभेद दोनों मौजूद हैं. बावजूद इजरायली सरकार की ओर से पीएम मोदी को दिया जा रहा महत्व दोनों देशों की बढ़ती नजदीकियों को गहराई देता है.

पीएम मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच द्विपक्षीय बातचीत में रक्षा सहयोग, सुरक्षा साझेदारी और नई तकनीकों पर विशेष फोकस रहेगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी.

भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत है. इजरायल भारत के प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है. ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, निगरानी तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग रहा है. इस दौरे के दौरान सुरक्षा और रक्षा सहयोग को लेकर नए एमओयू पर हस्ताक्षर होने की संभावना है.

यहूदी नरसंहार स्मारक पर श्रद्धांजलि

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26 फरवरी को पीएम मोदी यहूदी नरसंहार स्मारक का दौरा करेंगे और वहां श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. इसके अलावा वे इजरायल के राष्ट्रपति ईसाक हरजोग से भी मुलाकात करेंगे. यह कार्यक्रम प्रतीकात्मक रूप से ऐतिहासिक स्मृति और मानवीय मूल्यों के प्रति सम्मान को दर्शाता है. भारत और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए थे. तब से लेकर अब तक व्यापार, रक्षा, कृषि और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है. दोनों देशों के बीच व्यापार कई अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. आतंकवाद-रोधी सहयोग और खुफिया साझेदारी ने भी संबंधों को रणनीतिक गहराई दी है.

पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में यह यात्रा सुरक्षा सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.

अब बात करते हैं सीएम योगी के विदेश दौरे की.  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर के बाद जापान की राजधानी टोक्यो पहुंच चुके हैं. यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश इन्वेस्टमेंट रोडशो किया और जापानी निवेशकों से मुलाकात की. योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश को भगवान राम की जन्मभूमि और भगवान बुद्ध की पवित्र भूमि बताते हुए सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास को साथ लेकर चलने की बात कही. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और यहां निवेश के असीम अवसर हैं.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है. राज्य में व्यापक रेल नेटवर्क और तेजी से बढ़ती एयर कनेक्टिविटी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत आबादी युवा है, जो एक मजबूत वर्कफोर्स के रूप में उपलब्ध है. स्किल्ड मैनपावर और अपेक्षाकृत कम लागत निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. राज्य सरकार की नीतिगत स्थिरता और फास्ट-ट्रैक क्लीयरेंस सिस्टम को भी उन्होंने निवेशकों के सामने प्रमुख ताकत के रूप में रखा.

सिंगापुर में वैश्विक निवेशकों से मुलाकात
जापान से पहले योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर में प्रमुख निवेशकों से मुलाकात की. उन्होंने टेमासेक के चेयरमैन **Teo Chee Hean** से चर्चा की. इस दौरान डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, रिन्यूएबल एनर्जी और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर में संप्रभु निवेश की संभावनाओं पर बात हुई.

इसके अलावा उन्होंने जीआईसी के सीईओ लिम चाओ कियात से भी मुलाकात की. इस बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल पार्क, लॉजिस्टिक्स और शहरी विकास परियोजनाओं में दीर्घकालिक निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने गंगा एक्सप्रेसवे और अन्य परियोजनाओं में जीआईसी की मौजूदा भागीदारी की सराहना भी की. सरकार का लक्ष्य “ब्रांड यूपी” को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना और ‘मेक इन यूपी’ पहल को गति देना है.

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एक ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का विजन
योगी आदित्यनाथ अपने दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को भी सामने रख रहे हैं. वे जापान में निवेशक बैठकों के अलावा भारतीय समुदाय और छात्रों से भी संवाद करेंगे. राज्य सरकार का मानना है कि वैश्विक निवेश और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिये उत्तर प्रदेश को मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में डिवेलप किया जा सकता है.

डिप्लोमेसी और डेवलपमेंट की दो तस्वीरें
प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल दौरा जहां वैश्विक रणनीतिक संतुलन, सुरक्षा सहयोग और हाई क्वालिटी टेक्नीक शेयरिंग पर फोकस्ड है, वहीं योगी आदित्यनाथ का सिंगापुर-जापान दौरा आर्थिक कूटनीति और निवेश आकर्षित करने की दिशा में अहम कदम है. एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर भारत अपनी विदेश नीति को मजबूत कर रहा है, तो दूसरी ओर राज्य स्तर पर उत्तर प्रदेश वैश्विक पूंजी और तकनीक को आकर्षित करने की कोशिश में जुटा है. दोनों यात्राएं यह दर्शाती हैं कि आज की राजनीति में कूटनीति सिर्फ राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा, तकनीक, व्यापार और निवेश से सीधे जुड़ी हुई है.
 

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