पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ रही स्थिति को देखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार सुबह उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक बुलाई जो करीब डेढ़ घंटे चली. बैठक में देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय तेल टैंकर्स की सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई.
कार्तव्य भवन-2 में हुई इस अहम बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), तीनों सेना प्रमुख और शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने भाग लिया. इस उच्चस्तरीय बैठक का उद्देश्य भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से ऊर्जा आपूर्ति को बिना रुकावट जारी रखना है. इसी को लेकर भारतीय नौसेना को समुद्री कमर्शियल रास्तों की सुरक्षा के लिए अलर्ट पर रखा गया है.
बताया जा रहा है कि बैठक में सैन्य नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि भारतीय नौसेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास के घटनाक्रमों पर चौबीसों घंटे नजर रख रही है. व्यापारिक जहाजों के साथ निरंतर संपर्क बनाया गया है और उन्हें सुरक्षित नेविगेशन के लिए जरूरी सलाह दी जा रही है.
सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच समन्वय के साथ अगले 48 घंटों के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है. नौसेना की रैपिड रिस्पांस टीमें स्टैंडबाय पर हैं, ताकि स्थिति बिगड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके. भारत की ऊर्जा सुरक्षा इस संकट में सबसे ज्यादा दांव पर लगी हुई है, क्योंकि देश के लगभग 80 प्रतिशत तेल आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है.
रक्षा सचिव ने आपातकालीन प्रोटोकॉल और आकस्मिक योजनाओं पर ब्रीफिंग दी, ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके. नौसेना के युद्धपोत और समुद्री गश्ती विमानों को रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है, ताकि किसी भी उभरते खतरे का त्वरित जवाब दिया जा सके.
वहीं, सीडीएस ने प्रधानमंत्री के शब्दों को दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारत के हितों की रक्षा हर कीमत पर की जाएगी. पूरी दुनिया ने देखा कि भारत ने कैसे मोर्चा संभाला. भारत की इस त्वरित और निर्णायक कार्रवाई से होर्मुज क्षेत्र में सुरक्षा-व्यवस्था और मजबूत हुई है.
मंजीत नेगी