मैरिटल रेप अपराध है या नहीं...सुप्रीम कोर्ट अब 22 अक्टूबर को करेगा सुनवाई

पति के पत्नी से जबरन संबंध बनाने को बलात्कार के दायरे में लाने यानी मैरिटल रेप को भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध के दायरे में लाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब 22 अक्टूबर को सुनवाई करेगा.

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सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 17 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

पति के पत्नी से जबरन संबंध बनाने को बलात्कार के दायरे में लाने यानी मैरिटल रेप को भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध के दायरे में लाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब 22 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. मैरिटल रेप पर सुनवाई कर रही CJI की अध्यक्षता वाली बेंच यह तय करेगी कि इस मामले पर विस्तृत सुनवाई ज़रूरी है या नहीं? अगर विस्तृत सुनवाई की जरूरत है तो उसमें मुख्य कानूनी सवाल क्या होंगे?

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CJI का कहना है कि यहा मुख्य मुद्दा संवैधानिक वैधता का है. यह एक संवैधानिक सवाल है. हमारे सामने दो फैसले हैं और हमें उन पर फैसला करना होगा. CJI ने कहा कि यहां याचिकाकरता का तर्क भले ही यह हो कि वैवाहिक बलात्कार अपवाद मान्य हो लेकिन आरोप तय किए जा सकते हैं. फिर भी पहले हमें इसकी वैधता पर विचार करना होगा.

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने केंद्र की इस दलील पर याचिकाकर्ताओं से उनके विचार मांगे कि इस तरह के कृत्यों को दंडनीय बनाने से वैवाहिक संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा और विवाह संस्था में गंभीर गड़बड़ी पैदा होगी.

याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता करुणा नंदी ने दलीलें शुरू कीं और वैवाहिक बलात्कार पर आईपीसी और बीएनएस के प्रावधानों का हवाला दिया.

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सीजेआई ने कहा, 'यह एक संवैधानिक प्रश्न है. हमारे सामने दो फैसले हैं और हमें फैसला करना है. मुख्य मुद्दा (दंडात्मक प्रावधानों की) संवैधानिक वैधता का है.' नंदी ने कहा कि न्यायालय को एक प्रावधान को निरस्त करना चाहिए, जो असंवैधानिक है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आप कह रहे हैं कि यह (दंडात्मक प्रावधान) अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19, अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है. संसद ने अपवाद खंड को अधिनियमित करते समय इरादा किया था कि जब कोई व्यक्ति 18 वर्ष से अधिक आयु की पत्नी के साथ यौन क्रिया करता है तो इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता है.

आईपीसी की धारा 375 के अपवाद खंड के तहत, जिसे अब बीएनएस द्वारा रिप्लेस किया गया है, एक पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौन क्रिया, पत्नी नाबालिग न हो, बलात्कार नहीं है.

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