SIR पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर की याचिका

मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात और तानाशाही रवैये का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जिस संवैधानिक संस्था से निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की उम्मीद की जाती है, वही संस्था अब ऐसे स्तर पर पहुंच गई है जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए बेहद चिंताजनक है.

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ममता बनर्जी ने दाखिल की रिट याचिका. (Photo: PTI) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ममता बनर्जी ने दाखिल की रिट याचिका. (Photo: PTI)

इंद्रजीत कुंडू

  • कोलकाता,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:12 PM IST

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. बनर्जी ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सीईसी ज्ञानेश और बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारकी के खिलाफ रिट याचिका दाखिल की है.

यह याचिका 28 जनवरी को दायर की गई थी. याचिका में राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को सवालिया घेरे में खड़ा किया गया है. इससे पहले SIR पर ही टीएमसी नेता डोला सेन और डेरेक ओ ब्रायन भी याचिका दायर कर चुके हैं. उन पर सुनवाई भी चल रही है.

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ममता बनर्जी फिलहाल दिल्ली की फ्लाइट में सवार हैं. वह थोड़ी देर में दिल्ली पहुंच सकती है. वह टीएमसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त से शाम 4 बजे मुलाकात करेंगी.

बता दें कि पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इससे पहले 10 जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी भी लिखी थी. इस चिट्ठी में उन्होंने चुनाव आयोग पर राज्य की जमीनी हकीकत को न समझने और असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया था. 

ममता बनर्जी ने अपनी चिट्ठी में खासतौर पर बंगाल के प्रवासी मजदूरों और राज्य से बाहर रह रहे लोगों की समस्याओं का जिक्र किया था. उन्होंने लिखा था कि चुनाव आयोग ने बहुत देर से यह व्यवस्था दी कि कुछ मतदाता अपने अधिकृत पारिवारिक सदस्यों के जरिए सुनवाई में पेश हो सकते हैं, लेकिन यही सुविधा प्रवासी मजदूरों को नहीं दी गई. ममता ने इसे आयोग की संवेदनहीनता और जमीनी हालात की समझ की कमी बताया था.

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इससे पहले 3 जनवरी को भी ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि अधिकारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया. आईटी सिस्टम में खामियां हैं और आयोग की तरफ से कोई स्पष्ट योजना या समान टाइमलाइन नहीं है.

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