देश में एलपीजी के बढ़ते संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश में केरोसिन के वितरण के आदेश जारी किए हैं. लेकिन साल 2017 में राजस्थान हरियाणा उत्तर प्रदेश सहित देश के ज्यादातर राज्य में केरोसिन का वितरण बंद हो गया था. ऐसे में लोगों ने केरोसिन से चलने वाले चूल्हों को बेच दिया है.
सरकारी वितरण की दुकानों पर केरोसिन वितरण करने का सामान नहीं है. केरोसिन सब्सिडी उपभोक्ता को मिलेगा या सभी को मिलेगा, ये भी अभी साफ नहीं है. इसके अलावा कीमत और वितरण व्यवस्था भी नहीं है. ऐसे में प्रदेश स्तर के दुकान संचालकों की मानें तो सरकार का ये आदेश धरातल स्तर पर लागू होता नजर नहीं आ रहा है.
LPG सिलेंडर के लिए देश के अलग-अलग शहरों के राज्यों में लंबी कतार लग रही है. सरकार ने कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर रोक लगा दी है. घरेलू गैस सिलेंडरों के लिए भी मारामारी हो रही है. अलवर, भरतपुर, धौलपुर सहित राजस्थान के अलग-अलग शहरों में पुलिस की मौजूदगी में गैस सिलेंडरों का वितरण हो रहा है.
केरोसिन का वितरण कैसे होगा?
गैस सिलेंडर की बढ़ती हुई किल्लत को देखते हुए केंद्र सरकार ने केरोसिन के वितरण के आदेश जारी किए हैं. राजस्थान के सभी राज्यों में 48 हजार 240 दुकानों पर केरोसिन का वितरण किया जाएगा. इसमें राजस्थान की 2 हजार 928 दुकानें शामिल है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि केरोसिन का वितरण कैसे होगा? क्योंकि उचित मूल्य की सरकारी दुकानों पर केरोसिन वितरण का सामान नहीं है.
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लोगों के पास नहीं केरोसिन से चलने वाले चूल्हे-लालटेन
राजस्थान सहित देश के ज्यादातर राज्यों में सरकार ने 2016 के आखिर और 2017 की शुरुआत में केरोसिन के वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी. ऐसे में दुकानदारों ने वितरण का सभी सामान बेच दिया. केरोसिन बेचने वालों के खिलाफ भी सरकार ने एक्शन लिया तो बाजार से भी केरोसिन पूरी तरीके से गायब हो गया. ऐसे में परेशान लोगों ने घरों में मौजूद केरोसिन से चलने वाले चूल्हे, लालटेन और सामानों को बेच दिया.
उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल
अब सरकार के आदेश के बाद लोगों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. सरकारी उपभोक्ता के संचालकों ने बताया कि प्रदेश में कैसे केरोसिन का वितरण होगा. दुकानदार किस रेट पर केरोसिन बचेगा? कब और कैसे केरोसिन मिलेगा? किन उपभोक्ताओं को केरोसिन देना है? इस तरह से दर्जनों सवाल अभी दुकानदार और ग्राहकों के मन में बने हुए हैं.
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ऐसे में सरकार के आदेश सिर्फ कागजों तक सिमटे हुए नजर आ रहे है. इस संबंध में लोगों ने कहा कि केरोसिन का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के पास कोई संसाधन में उपकरण भी नहीं है. तो लोग केरोसिन लेकर क्या करेंगे?
हिमांशु शर्मा