मौजूदा लोकसभा में दल-बदल कानून के तहत सदस्य को अयोग्य घोषित करने के लिए एक आवेदन दाखिल हुआ है. पिछली लोकसभा के कार्यकाल में दो सदस्यों को अयोग्य घोषित करने की याचिकाएं दाखिल हुई थीं. हालांकि, दोनों ही याचिकाओं पर तीन साल तक कोई फैसला नहीं हो सका. लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही यह याचिकाएं अपने आप समाप्त हो गई थीं.
आजतक की ओर से आरटीआई के तहत लगाए गए आवेदन पर लोकसभा सचिवालय ने यह जानकारी दी है. आरटीआई के जवाब में लोकसभा सचिवालय की ओर से यह जानकारी दी गई है कि मौजूदा लोकसभा में दल-बदल के तहत अयोग्यता की एक याचिका 19 मार्च 2026 को जनता दल यूनाइटेड की ओर से दाखिल की गई है.
जेडीयू सांसद दिलेश्वर कामत ने अपनी पार्टी के सांसद गिरिधारी यादव को अयोग्य घोषित करने की याचिका लगाई है. यह स्पीकर ओम बिरला के पास लंबित है. इस आवेदन पर लोकसभा सचिवालय की ओर से दिए गए जवाब में दल-बदल से जुड़ी अयोग्यता याचिका वर्षों तक लंबित रहने की भी जानकारी मिली है.
लोकसभा सचिवालय की ओर से दिए गए जवाब के मुताबिक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पिता और टीएमसी के सांसद शिशिर कुमार अधिकारी को अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए 12 मई 2021 को याचिका दाखिल हुई थी. यह याचिका टीएमसी के सुदीप बंदोपाध्याय ने दाखिल की थी.
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वहीं, वाईएसआरसीपी सांसद के रघु राम कृष्ण राजू के खिलाफ 7 जुलाई 2021 को पार्टी के चीफ व्हिप ने अयोग्यता याचिका दाखिल की थी. ये दोनों ही मामले जांच के लिए जनवरी 2022 में विशेषाधिकार समिति को भेज दिए गए थे. लोकसभा सचिवालय ने स्पष्ट कहा है कि 17वीं लोकसभा के दौरान दाखिल दोनों याचिकाएं सदन भंग होने के साथ ही 5 जून 2024 को स्वतः समाप्त मानी गईं.
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संसदीय परंपरा का हवाला देते हुए लोकसभा सचिवालय ने कहा है कि लोकसभा भंग होने के साथ ही सदन और उसकी समितियों के समक्ष लंबित सभी आवेदन खुद ही समाप्त माने जाते हैं.
अशोक उपाध्याय