कोलकाताः महामारी के दौर में छोटे आयोजकों के लिए चुनौती रही दुर्गा पूजा, कैसे किया सामना

भोजन वितरण के दौरान भी सावधानियां रखी गईं. सचिव राजू गोस्वामी ने कहा कि भोजन के लिए हमने एक अलग क्षेत्र की व्यवस्था की है. हम इसे किसी हॉल के अंदर नहीं कर रहे हैं. हमने इसे एक खुली जगह में व्यवस्थित किया है ताकि लोग अपनी शारीरिक दूरी बनाए रख सकें.

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मां दुर्गा की पूजा करती श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा करती श्रद्धालु

मनोज्ञा लोइवाल

  • कोलकाता,
  • 26 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 8:53 AM IST
  • लोगों की पहुंच से करीब 5 फीट दूर रखी गईं मूर्तियां
  • आयोजकों ने आपात स्थिति के लिए बनाई कोविड टीम
  • खाना की व्यवस्था हॉल की बजाए खुले एरिया में की गई

कोरोना संकट की वजह से इस साल सभी तरह के आयोजनों पर ग्रहण लग रहा है. दुर्गा पूजा के दौरान जहां बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और हर्षोल्लास के साथ त्योहार का जश्न मनाते हैं लेकिन इस साल यह कोरोना की भेंट चढ़ गया. दुर्गा पूजा के लिए मशहूर बंगाल में इसके आयोजन को लेकर विशेष सावधानी बरती गई. बड़े आयोजकों के साथ-साथ छोटे आयोजकों ने भी कोरोना निर्देशों के साथ इस साल का दुर्गा पूजा समारोह का आयोजन किया.

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दमदम में जेके गार्डन एक आवासीय परिसर (कॉम्प्लेक्स) है, जहां आयोजकों ने साधारण और सुरक्षित दुर्गा पूजा की चुनौतियों का लगातार सामना किया और यह कोशिश करते रहे कि कहीं कोई दिक्कत न होने पाए तथा रंग में भंग न पड़े.

इस साल दुर्गा पूजा मनाने के लिए स्थानीय निवासियों को पूजा की स्थापना करते समय बहुत सी बातों को ध्यान में रखना पड़ा. पंडाल को एक खुले स्थान पर स्थापित किया गया था और मूर्तियों को श्रद्धालुओं से करीब 5 फीट की दूरी पर स्थापित किया गया था. साथ ही चारों ओर मास्क पहनने के बोर्ड लगाए गए थे.

जेके गार्डन के सचिव राजू गोस्वामी कहते हैं कि यहां करीब 134 परिवार रहते हैं. इस बार हम बहुत सारी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. हम बहुत सावधानी बरत रहे हैं. हमने रोजाना प्रतिदिन पूरे पंडाल क्षेत्र को सेनेटाइज किया. हमने सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए मंच तैयार किया है. हम इसे भी सैनिटाइज कर रहे हैं. यहां तक ​​कि फूड एरिया को भी. कभी-कभी हम इसे दिन में दो बार भी सेनेटाइज कर रहे हैं.

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साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए स्टेज भी लगाए गए. लेकिन आयोजकों ने यहां भी सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखने की कोशिश की. कॉम्प्लेक्स की निवासी और एक प्रतिभागी मधुमिता दास विश्वास कहती हैं, कि पहला एहतियात यही है कि एंट्री गेट पर ही काउंटर स्थापित किया गया. जो भी पास से गुजर रहा है उसे अपने हाथों को सेनेटाइज करना होगा. यहां तक ​​कि प्रतिभागियों को स्टेज पर पहुंचने से पहले अपने दोनों हाथों और पैरों को सेनेटाइज करना होता है.

यही नहीं भोजन वितरण के दौरान भी सावधानियां रखी जाती हैं. सचिव राजू गोस्वामी ने कहा, 'भोजन के लिए हमने एक अलग क्षेत्र की व्यवस्था की है. हम इसे किसी हॉल के अंदर नहीं कर रहे हैं. हमने इसे एक खुली जगह में व्यवस्थित किया है ताकि लोग अपनी शारीरिक दूरी बनाए रख सकें. हम पश्चिम बंगाल सरकार के साथ-साथ भारत सरकार को दिए गए सभी मानदंडों का पालन कर रहे हैं.'

उन्होंने युवा लोगों की एक कोविड टीम भी बनाई जो कोरोना महामारी को देखते हुए किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रखा गया. इस साल हम सभी खतरे में हैं, इसलिए हमने निवासियों के भविष्य के बारे में सोचकर एक कोविड टीम बनाई है. यदि हमारे परिसर में कोई भी संक्रमित होता है, तो कोविड टीम के सदस्य उनकी मदद के लिए फुल सपोर्ट करेंगे. फुल सपोर्ट से मेरा मतलब है कि टेस्टिंग, दवाओं और यहां तक ​​कि जरूरत पड़ने पर वस्तुओं को खरीदने में उनकी मदद करना.

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कोविड टीम बनाई गई

दुर्गा पूजा के पांचवें दिन पंचमी पर काम्प्लेक्स के सदस्यों ने अपनी 'कोविड टीम' के सदस्यों को सम्मानित किया. साथ ही लॉकडाउन के दौरान हर रोज विभिन्न तरीकों से इस परिसर की सेवा करने वाले सुरक्षा गार्ड, स्वीपर, डॉक्टरों जैसे लोगों को भी सम्मानित किया गया.

अष्टमी के दिन, एक उचित कतार और दूरी बनाए रखी गई थी. थर्मोकोल प्लेटों में व्यक्तिगत रूप से फूल सर्व किए गए. प्रसाद वितरण के दौरान किसी भी शारीरिक संपर्क की अनुमति नहीं थी. मां दुर्गा को लगाए जाने वाले भोग के बारे में, भोग की देखभाल करने वाली एक अन्य निवासी गीता मुखर्जी ने बताया, “मैं हर साल भोग बनाती हूं, लेकिन इस साल यह अलग रहा. मुझे हर बार मास्क पहनना और खुद को सेनिटाइज करना पड़ता था.  

कोरोना महामारी के दौरान बाजारों में सब्जियों और फूलों की कीमत में भारी वृद्धि हुई है. कॉम्पलेक्स के उपाध्यक्ष रतन मुखर्जी कहते हैं, “चीजों की उपलब्धता की समस्या रही. चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं हैं. पिछले साल की तुलना में इस साल चीजें बहुत महंगी रहीं. कमल का फूल जो पिछले साल 10 रुपये में मिला करता था इस साल यह 50 रुपये में मिला. प्याज, आलू आदि जैसी अन्य चीजों के दाम भी ज्यादा रहे.

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दशमी के दौरान विसर्जन के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर निकलते हैं और जुलूस निकाले जाते हैं, लेकिन समिति के एक सदस्य ने कहा कि हमने इस साल खुद को नियंत्रित किया है क्योंकि यह समय महामारी का समय है. हमने अपने प्रियजनों को खोया है. इसलिए इस साल हमने जुलूस को रद्द करने का फैसला किया है. इस तरह से इस साल सभी तरह की सावधानियों और ऐहतियात के साथ दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया.

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