दीपम विवाद: 'हिलटॉप पर दीप जलाया जा सकता है...', HC ने स्टालिन सरकार के 'सियासी एजेंडे' पर लगाई फटकार

तमिलनाडु के कार्तिकेय दीपम विवाद पर मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक शांति बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और प्रशासन को राजनीतिक कारणों से प्रेरित होकर कोई भी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए.

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मद्रास हाई कोर्ट ने मदुरै पहाड़ी पर दरगाह के पास दीया जलाने की इजाज़त देने वाले आदेश को बरकरार रखा है. (File Photo: PTI) मद्रास हाई कोर्ट ने मदुरै पहाड़ी पर दरगाह के पास दीया जलाने की इजाज़त देने वाले आदेश को बरकरार रखा है. (File Photo: PTI)

प्रमोद माधव

  • नई दिल्ली,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने कार्तिकेय दीपम से जुड़े मामले में सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा है. अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति से जुड़े मुद्दों के लिए सीधे तौर पर सरकार उत्तरदायी है. बेंच ने जोर देकर कहा कि सरकार को अपने फैसले राजनीतिक आधार पर नहीं लेने चाहिए. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि 'दीपथून' (Deepathun) उस स्थान पर स्थित है, जो देवस्थानम (Devasthanam) की संपत्ति के अंतर्गत आता है.

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कोर्ट ने स्टालिन सरकार को नसीहत देते हुए कहा, "किसी भी विवाद को सुलझाते समय निष्पक्षता जरूरी है. सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर सरकार की भूमिका अहम होती है और उसे राजनीति से ऊपर उठकर काम करना चाहिए."

एकल न्यायाधीश के पिछले आदेश को सही ठहराते हुए कोर्ट ने प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सचेत किया.

देवस्थानम की जमीन पर स्थित है दीपथून

विवादित स्थल के मालिकाना हक पर स्पष्टता देते हुए मदुरै बेंच ने माना कि दीपथून देवस्थानम की भूमि पर स्थित है. कोर्ट के इस फैसले से मालिकाना हक को लेकर चल रही बहस पर विराम लग गया है. कोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया है कि वह सार्वजनिक शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए और यह सुनिश्चित करे कि धार्मिक परंपराओं और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बना रहे.

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कोर्ट की सख्त टिप्पणी...

हाई कोर्ट ने राज्य के कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर को 'काल्पनिक भूत' कहा है. अदालत ने कहा कि दीपम जलाने की इजाज़त देने से शांति भंग नहीं होगी, जब तक कि गड़बड़ी 'खुद राज्य द्वारा प्रायोजित' न हो. राज्य और देवस्थानम यह साबित करने में नाकाम रहे हैं कि दीपम जलाना प्रचलित प्रथा नहीं है.

कोर्ट ने कहा कि जिला प्रशासन ने अपनी “सुविधा के लिए” शांति के लिए खतरा बताया. अदालत ने प्रशासन पर शक और अविश्वास के ज़रिए एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने का आरोप लगाया है.

हाई कोर्ट ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की राज्य की क्षमता पर सवाल उठाया और कहा कि राज्य ने सार्थक बातचीत के ज़रिए सांप्रदायिक मतभेदों को पाटने का मौका गंवा दिया. हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि दीपस्तंभ पर दीपम जलाया जाना चाहिए, ‘रोशनी हो, लड़ाई नहीं.’

कोर्ट ने कहा, “यह हास्यास्पद और मानने में मुश्किल है कि शक्तिशाली राज्य को यह डर है कि देवस्थानम के प्रतिनिधियों को पत्थर के खंभे पर दीपक जलाने की इजाज़त देने से सार्वजनिक शांति भंग होगी. बेशक, ऐसा तभी हो सकता है जब ऐसी गड़बड़ी खुद राज्य द्वारा प्रायोजित हो. हम प्रार्थना करते हैं कि कोई भी राज्य अपने राजनीतिक एजेंडे को हासिल करने के लिए इस स्तर तक न गिरे.”

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क्या है विवाद?

तमिलनाडु की थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर सुब्रमण्या स्वामी मंदिर और सिकंदर बादशाह दरगाह स्थित हैं. विवाद का केंद्र दीपाथून स्तंभ (दरगाह से 15 मीटर दूर) पर कार्तिगै दीपम जलाने का है. हिंदुत्व संगठनों ने अनुमति मांगी, मद्रास हाईकोर्ट ने 2025 में छूट दे दी. तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर लागू नहीं किया, जिससे झड़पें हुईं. 

अब कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एकल जज के आदेश को बरकरार रखा और सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है. 

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