पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में भारी बारिश से भूस्खलन, अक्टूबर की शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर में मध्यम बारिश और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में ताज़ी बर्फबारी, इस हफ़्ते भारत का वेदर मैप विरोधाभासों के एक अद्भुत मिलावट की तरह नजर आ रहा है. इसके पीछे क्या वजह है?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून की वापसी के बाद पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव पड़ना सामान्य है. हालांकि, इस बार विक्षोभ काफी तेज है. विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन को हर असामान्य घटना का सिर्फ एक कारण मानने से सतर्क करते हैं. उच्च ऊंचाई पर मौजूद जेट स्ट्रीम इन प्रणालियों को उत्तरी भारत तक लाती है, जिससे मौसम बदला है.
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अक्षय देवरास और डॉ. वी. विनोज ने यह जानकारी दी है. उत्तर भारत में असामान्य मौसम का कारण तेज पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) है. दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) में भारी बारिश से भूस्खलन, दिल्ली-एनसीआर में मध्यम बारिश और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में ताजा बर्फबारी हुई है. यह घटनाक्रम अक्टूबर की शुरुआत में हुआ है. भूमध्यसागरीय क्षेत्र से आने वाली ये मौसम प्रणालियां उत्तरी भारत में नमी और अस्थिरता लाती हैं.
पश्चिमी विक्षोभ है अस्थिर मौसम की वजह...
यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के रिसर्च साइंटिस्ट डॉ. अक्षय देवरास ने कहा कि उत्तर भारत में मौजूदा अस्थिर मौसम के लिए मजबूत पश्चिमी विक्षोभ जिम्मेदार है. उन्होंने बताया कि मॉनसून की वापसी के बाद इन मौसम प्रणालियों का उत्तरी भारत को प्रभावित करना सामान्य है. जेट स्ट्रीम नामक उच्च ऊंचाई पर हवा का पैटर्न इन प्रणालियों के लिए एक मार्ग के रूप में कार्य करता है. अगस्त में भी पश्चिमी विक्षोभ असामान्य रूप से मजबूत थे.
क्या हर मौसम बिगड़ने की वजह क्लाइमेट चेंज है?
आईआईटी भुवनेश्वर के जलवायु शोधकर्ता डॉ. वी. विनोज के मुताबिक, भारत एक उपमहाद्वीप है, जो करीब हर तरह की मौसम घटना के संपर्क में है. एक्सपर्ट हर विसंगति को तुरंत जलवायु परिवर्तन से जोड़ने के खिलाफ सावधानी बरतते हैं, क्योंकि वास्तविकता कहीं ज्यादा जटिल है. भारत का मौसम वैश्विक टेलीकनेक्शन जैसे ENSO (अल नीनो-दक्षिणी दोलन) और स्थानीय कारकों जैसे शहरीकरण और भूमि-उपयोग में परिवर्तन के संयोजन से बनता है.
इस बार ज्यादा बारिश का अनुमान क्यों?
डॉ. विनोज ने कहा कि ENSO टेलीकनेक्शन शुरुआती गर्मियों में लू (heatwaves) और मॉनसून की वर्षा दोनों को प्रभावित करता है. मौजूदा वक्त में, हम धीरे-धीरे ENSO के थोड़ा नकारात्मक चरण की ओर बढ़ रहे हैं, जो नम स्थितियों की संभावना को बढ़ाता है. इस बार पश्चिमी विक्षोभ भी काफी तेज थे, जिससे उत्तरी इलाकों में भारी बारिश हुई है. गहरे दबाव ने नमी प्रदान की, जिसने ओरोग्राफी (पर्वतीय क्षेत्रों) के साथ मिलकर गंभीर मौसम को बढ़ावा दिया.
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क्या इस बार कड़ाके की सर्दी पड़ेगी?
डॉ. देवरास के मुताबिक, शुरुआती अक्टूबर में एक या दो पश्चिमी विक्षोभ इस बात के पर्याप्त संकेतक नहीं हैं कि अगले कुछ महीनों में क्या होगा. उन्होंने बताया कि ला नीना आमतौर पर उत्तरी भारत में ठंडी सर्दियां लाती है. हालांकि, पिछले कुछ साल से एक पैटर्न देखा गया है, जिसमें सर्दियों के शुरुआती हिस्से के दौरान पश्चिमी विक्षोभ कम हो गए हैं, जिससे सर्दी की शुरुआत सूखी रही है. यह एक क्षणिक मौसम पैटर्न है, और 7 अक्टूबर के बाद मौसम सूखा हो जाएगा, जिसके बाद पूरे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सामान्य सुबह की ठंड महसूस होगी.
मौसम प्रणाली अधिक अनिश्चित होती जा रही है, इसलिए डॉ. विनोज स्थानीय वास्तविकताओं के अनुरूप विज्ञान-समर्थित अनुकूलन योजनाओं की जरूरत पर जोर देते हैं. विशेषज्ञ का कहना है कि ऐसा नजरिया निस्संदेह हमें इस बढ़ती साफ चुनौती का सामना करने में मदद करेगा.
मिलन शर्मा