लोकसभा में गुरुवार की दोपहर राजनीति सिर्फ बोली नहीं जा रही थी, उसे जिया जा रहा था. शब्दों में, खामोशियों में और उनके बीच के हर इशारे में. एक पॉलिटिकल रिपोर्टर के तौर पर मेरे लिए यह दिलचस्प था कि महिला आरक्षण बिल पर बहस के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों ही नीले रंग की पोशाक में नजर आए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर लोकसभा को संबोधित करने वाले थे- एक ऐसा प्रस्ताव जिसमें उम्मीद और राजनीतिक महत्व दोनों थे. मैं दोपहर 2:40 बजे लोकसभा की विजिटर्स गैलरी में पहुंच गई, पीएम मोदी के भाषण से पूरे 20 मिनट पहले. उनका संबोधन शुरू होने से पहले जो माहौल दिख रहा था, उससे संकेत मिल रहे थे कि तैयारी पूरी है.
चारों पब्लिक गैलरी में एक बात साफ दिख रही थी- महिलाओं की बड़ी और स्पष्ट मौजूदगी. एक सेक्शन में पारंपरिक बंगाली परिधान पहने महिलाओं का समूह बैठा था. पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को देखते हुए यह राजनीतिक संदेश साफ था. ये ऑप्टिक्स यूं ही नहीं, बल्कि रणनीतिक थे.
क्रिकेट मैच जैसा था सदन का माहौल
लोकसभा का माहौल किसी क्रिकेट मैच जैसा लग रहा था, जहां दोनों टीमें (सत्ता पक्ष और विपक्ष) अपने-अपने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ मैदान में उतर रही थीं. दोपहर 2:48 बजे, प्रियंका गांधी वाड्रा गहरे नीले रंग की साड़ी में सदन में दाखिल हुईं. एक मिनट बाद निर्मला सीतारमण विपक्षी बेंचों की तरफ से आईं और आगे की पंक्ति में बैठीं.
इसके कुछ देर बाद अभिनेत्री से सांसद बनीं कंगना रनौत गुलाबी साड़ी में पहुंचीं, जिससे प्रमुख चेहरों की मौजूदगी और बढ़ गई. 2:52 बजे, गृह मंत्री अमित शाह हल्के नीले कुर्ते में पहुंचे. कुछ ही क्षणों में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे उनके पास आए और दोनों के बीच कुछ बातचीत हुई. 2:55 बजे तक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी अमित शाह के पास अपनी सीट ले चुके थे. सरकार की टॉप लीडरशिप की मौजूदगी लोकसभा में दिखी.
ध्यानमग्न नजर आ रही थींं प्रियंका गांधी
कांग्रेस की बेंच पर प्रियंका गांधी काफी ध्यानमग्न नजर आ रही थींं. हाथ में पेन और नोटपैड लिए वह किसी स्टूडेंट की तरह दिख रही थीं- ध्यान से सुनती हुईं, हर बात नोट करती हुईं. दोपहर 2:57 बजे के. सी. वेणुगोपाल ने उनसे संक्षिप्त बातचीत की. हालांकि विपक्षी बेंच का दृश्य मिला-जुला था. जहां कांग्रेस की मौजूदगी दिख रही थी, वहीं राहुल गांधी, अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी उस समय अनुपस्थित थे.
PM की एंट्री और सत्ता पक्ष के जयकारे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2:58 बजे लोकसभा में दाखिल हुए, उनके साथ किरेन रिजिजू, जितेंद्र सिंह और अर्जुन राम मेघवाल जैसे केंद्रीय मंत्री भी थे. पीएम मोदी के सदन में आने के साथ ही सत्ता पक्ष की ओर से 'भारत माता की जय' के नारे गूंज उठे. सत्ता पक्ष मुखर था, जबकि विपक्ष शांत नजर आया.
पीएम मोदी के भाषण शुरू होने से पहले ही कार्यवाही में कुछ बाधाएं दिखीं. करीब 3 बजे हरदीप सिंह पुरी के प्रवेश के दौरान कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड ने ‘एपस्टीन’ का मुद्दा उठाते हुए नारे लगाए, जिसे सत्ता पक्ष ने नजरअंदाज किया. प्रधानमंत्री मोदी ने 3:02 बजे अपना भाषण शुरू किया. करीब 3:05 बजे अखिलेश यादव अपने सांसदों के साथ सदन में पहुंचे, उनके पीछे अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद आए. डिंपल यादव भी 3:07 बजे अपनी सीट पर बैठीं.
नोट्स, इशारे और राजनीतिक संकेत
पीएम मोदी का संबोधन शुरू होने के छह मिनट बाद, दोपहर 3:08 बजे प्रियंका गांधी ने नोट्स बनाना शुरू किया. वह लगातार सुनतीं, लिखतीं और तैयारी करती नजर आईं. प्रधानमंत्री ने हल्के अंदाज में कांग्रेस पर तंज कसा और विपक्ष की ओर देखा- प्रियंका गांधी ने तुरंत उस टिप्पणी को नोट कर लिया. राजनीतिक नजरिए से ये छोटे-छोटे इशारे- नजरें, ठहराव, नोट्स कई बार शब्दों से ज्यादा बयान करते हैं.
SP सांसदों ने उठाया ओबीसी का मुद्दा
दोपहर 3:16 बजे समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव और धर्मेंद्र यादव महिला आरक्षण में ओबीसी प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाने के लिए खड़े हो गए. प्रधानमंत्री मोदी ने तुरंत जवाब देते हुए खुद को ओबीसी बताया और इसे राजनीतिक जवाब में बदल दिया. करीब 3:19 बजे अखिलेश यादव ने जवाब देते हुए ओबीसी के साथ न्याय की मांग दोहराई.
राहुल गांधी की एंट्री और विपक्षी संकेत
राहुल गांधी दोपहर 3:20 बजे सदन में पहुंचे. प्रियंका गांधी के पास से गुजरते हुए उन्होंने उनके कंधे पर हल्का सा हाथ रखा. कुछ ही देर बाद उन्होंने अखिलेश यादव की ओर अंगूठा दिखाकर इशारा किया, जिस पर अखिलेश ने हाथ जोड़कर प्रतिक्रिया दी. यह विपक्षी तालमेल का का छोटा लेकिन महत्वपूर्ण संकेत था. तृणमूल सांसदों की सीटें लगभग खाली थीं, महुआ मोइत्रा जैसे नेता मौजूद नहीं थे. करीब 3:29 बजे कल्याण बनर्जी अचानक खड़े हुए और बोलने की कोशिश की. माइक्रोफोन चालू नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री ने हल्के अंदाज में कहा कि उन्हें बोलने दिया जाए.
PM का टकराव नहीं, सहमति पर जोर
जब बहस महिला आरक्षण का श्रेय लेने की ओर बढ़ी, प्रधानमंत्री मोदी ने नरम रुख अपनाया. उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का पूरा श्रेय विपक्ष को देने की पेशकश की, यहां तक कि विपक्षी नेताओं की तस्वीरों के साथ सरकारी विज्ञापन छपवाने की भी बात कही. यह एक रणनीतिक कदम था. संदेश साफ था: महिला आरक्षण विधेयक पर टकराव से ज्यादा सहमति पर जोर.
भाषण के दौरान राहुल गांधी, के. सी. वेणुगोपाल और मणिकम टैगोर आपस में चर्चा करते नजर आए. प्रियंका गांधी लगातार नोट्स बनाती रहीं. करीब 3:39 बजे, 37 मिनट बाद प्रधानमंत्री ने अपना संबोधन समाप्त किया. डीएमके सांसदों के ‘काला टीका’ लगाकर आने पर तंज कसते हुए सभी सांसदों का आभार जताया. प्रधानमंत्री का भाषण खत्म होते ही ध्यान फिर विपक्ष की ओर गया. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, के. सी. वेणुगोपाल और मणिकम टैगोर एक साथ बैठकर रणनीति पर चर्चा करते नजर आए. इसके बाद चारों नेता साथ में सदन से बाहर निकल गए, उनकी बातचीत बाहर भी जारी रही.
सियासत के कई आयामों का प्रदर्शन
इन 37 मिनटों में जो कुछ हुआ, वह सिर्फ एक भाषण नहीं था. यह मल्टी-लेयर्ड पॉलिटिक्स का प्रदर्शन था- ऑप्टिक्स, टाइमिंग, तीखी बहस और सूक्ष्म संकेतों से भरा हुआ. विजिटर गैलरी की साज-सज्जा से लेकर विपक्ष की प्रतिक्रियाओं तक, खामोशी से नोट्स बनाने से लेकर सत्ता और विपक्ष के सदस्यों के बीच तालमेल तक- हर चीज में एक बड़ा पॉलिटिकल मैसेज था.
ऐश्वर्या पालीवाल