'10 लाख आबादी पर 22 जज, 3 लाख से ज्यादा अंडरट्रायल कैदी',  कानून मंत्री ने राज्यसभा में दी जानकारी

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में यह जानकारी दी है कि देश में प्रति 10 लाख आबादी पर लगभग 22 जज हैं. कानून मंत्री मेघवाल ने इस अनुपात की गणना का फॉर्मूला भी बताया है.

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केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दिया लिखित जवाब (File Photo: PTI) केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दिया लिखित जवाब (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:45 PM IST

संसद के चालू बजट सत्र के दूसरे दिन गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा में आर्थिक सर्वे पेश किया. राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान न्यायपालिका से संबंधित प्रश्न भी पूछे गए. एक प्रश्न के लिखित जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी है कि देश में 10 लाख आबादी पर 22 जज हैं. कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने यह जानकारी दी है.

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कानून मंत्री मेघवाल ने अपने लिखित जवाब में यह जानकारी दी है कि फिलहाल देश में जज-जनसंख्या अनुपात लगभग 22 जज प्रति 10 लाख आबादी है. उन्होंने यह भी बताया है कि किसी विशेष वर्ष में प्रति 10 लाख आबादी पर जजों की संख्या निकालने के लिए कानून मंत्रालय वर्ष 2011 की जनगणना के जनसंख्या आंकड़े (1210.85 मिलियन) और वर्ष 2026 में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और जिला, अधीनस्थ अदालतों में स्वीकृत जजों की संख्या को आधार मानता है.

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कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने यह भी बताया है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में देश में अंडरट्रायल कैदियों की संख्या 3 लाख 89 हजार 910 थी. उन्होंने अपने लिखित जवाब में यह भी कहा है कि मामलों का निपटारा पूरी तरह न्यायपालिका के विशेषाधिकार क्षेत्र में आता है. कानून मंत्री मेघवाल ने लिखित जवाब में अदालतों में मामले पेंडिंग रहने की कई वजहें भी बताई हैं.

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उन्होंने कहा है कि मामलों के तथ्यों की जटिलता, साक्ष्यों की प्रकृति, संबंधित पक्षों- वकीलों, जांच एजेंसियों, गवाहों और वादियों के सहयोग के साथ ही भौतिक ढांचे और सहायक न्यायालय स्टाफ की उपलब्धता शामिल है. गौरतलब है कि कानून आयोग की 120वीं रिपोर्ट वर्ष 1987 में आई थी. कानून आयोग ने अपनी इस रिपोर्ट में प्रति 10 लाख आबादी पर 50 जजों की सिफारिश की थी.

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