भारतीय वायु सेना (IAF) ने एक दुर्घटना में अपना एक और तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) खो दिया है. इस बीच खबर आई है कि तेजस Mk1A का इसी साल अप्रैल में गहन आकलन करेगी.
2024 से तीन विमान खोने के बाद अब वायूसेना पूरी सावधानी के साथ इस नए और एडवांस वर्जन को अपनाना चाहती है. इस परीक्षण के बाद ही ये तय होगा कि विमान को वायुसेना के बेड़े में कब शामिल किया जाएगा.
क्यों हो रही डिलीवरी में देरी?
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के इस लड़ाकू विमान की डिलीवरी में पहले ही लगभग दो साल की देरी हो चुकी है. वायुसेना अपनी घटती स्क्वाड्रन संख्या को लेकर परेशान है. HAL के मुताबिक अमेरिका से मिलने वाले इंजन की सप्लाई में आ रही बाधाओं की वजह से इसमें देरी हो रही है.
वायुसेना के सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि वायुसेना विमान को जल्द ही शामिल करने के पक्ष में तो है, लेकिन वो इसकी कोर कॉम्बैट कैपिबिलिटी से कोई समझौता नहीं करना चाहती.
3 कारकों पर वायुसेना का फोकस
वायुसेना ने 3 कारक तय किए हैं, जिनपर कोई समझौता नहीं हो सकता है. पहला, मिसाइल दागने की शक्ति. दूसरा, रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का सही तालमेल और तीसरा, वीपन सिस्टम. वायुसेना के मुताबिक ये चीजें युद्ध जीतने के लिए सबसे जरूरी हैं.
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हालांकि, विमान से जुड़ी कागजी कार्रवाई या छोटे-मोटे फीचर्स में वो थोड़ी ढील दे सकती है. क्योंकि इन्हें बाद में भी पूरा किया जा सकता है.
जांच के बाद फ्रंटलाइन स्क्वाड्रन का हिस्सा बनेगा तेजस Mk1A
HAL के मुताबिक, पांच तेजस Mk1A विमान पूरी तरह तैयार हैं. अप्रैल में होने वाले आकलन के दौरान वायुसेना इनके सभी तकनीकी डेटा की जांच करेगी. अगर सब कुछ सही रहा, तो इसके बाद 'एक्सेप्टेंस ट्रायल' शुरू होंगे, जो कुछ हफ्तों तक चलेंगे. इसके बाद ही तेजस Mk1A को फ्रंटलाइन स्क्वाड्रन का हिस्सा बनाया जाएगा.
शिवानी शर्मा