भारत और अमेरिका के बीच लंबी चली बातचीत के बाद आखिरकार ट्रेड को लेकर सहमति बन गई है. अमेरिका भारत पर लगे आयात शुल्क को 18 फीसदी तक घटाने की बात कही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दावा किया गया कि रूस से भारत अब तेल ख़रीदना बंद कर देगा. अमेरिका ने भारत के एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर बड़ा दावा किया था. अब ट्रंप के दावों पर विदेश मंत्रालय का जवाब आ गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा यह दावा किए जाने के बाद कि भारत रूस से तेल खरीद बंद करेगा और वेनेजुएला या अमेरिका से कच्चा तेल खरीदेगा, भारत सरकार ने इस पर साफ और बैलेंस्ड रिएक्शन दिया है. विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत की एनर्जी पॉलिसी किसी राजनीतिक बयानबाजी या बाहरी प्रेसर से नहीं, बल्कि देश की एनर्जी के जरूरतों और बाजार की रियलिटी से तय होती है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत के लिए 1.4 अरब लोगों की एनर्जी सिक्योरिटी टॉप प्रायोरिटी है. इसी सोच के तहत भारत अलग-अलग देशों से तेल इंपोर्ट करता रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि वेनेजुएला भारत का पुराना एनर्जी पार्टनर रहा है. भारत 2019-20 तक वेनेजुएला से तेल इंपोर्ट करता था, लेकिन इंटरनेशनल सैंक्शन की वजह से इसे रोकना पड़ा. बाद में 2023-24 में फिर से खरीद शुरू हुई, लेकिन सैंक्शन दोबारा लगने के बाद यह भी बंद करनी पड़ी.
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सरकार ने यह भी साफ किया कि रूस से तेल खरीद को लेकर कोई ऑफिशियल फैसला या ऐलान नहीं किया गया है. भारत ने न तो रूस से तेल खरीद बंद करने की कंफर्म है और न ही किसी एक देश पर निर्भर रहने की बात कही है. भारत का कहना है कि तेल इंपोर्ट से जुड़े फैसले पूरी तरह कमर्शियल के आधार पर, उपलब्धता, प्राइस और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका भारत पर रूसी तेल की खरीद कम करने का दबाव बना रहा है और अल्टरनेटिव रुट्स के तौर पर अमेरिका और वेनेजुएला के तेल को बढ़ावा देने की बात कर रहा है. हालांकि भारत ने दोहराया है कि वह सभी ऑप्श्नस को खुले मन से देखता है, लेकिन किसी भी फैसले में एनर्जी सिक्योरिटी से समझौता नहीं करेगा.
सरकार का यह रुख बताता है कि भारत अपनी विदेश और एनर्जी पॉलिसी ख़ुद तय करता है. उस पर किसी का दबाव नहीं चलता है. चाहे रूस हो, अमेरिका हो या वेनेजुएला, भारत का फोकस केवल इस बात पर है कि देश की जरूरतें पूरी हों और इकोनॉमिकली बैलेंस्ड फैसले लिए जाएं.
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