रूस से हथियारों की खरीद पर जर्मन चांसलर ने दिया बयान, विदेश सचिव ने साफ किया भारत का रुख

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग को लेकर दिए गए बयान पर चर्चा तेज हो गई. मर्ज ने कहा कि भारत-जर्मनी सहयोग से भारत की रूस पर निर्भरता घटेगी. इस पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारत की रक्षा खरीद नीति को राष्ट्रीय हित आधारित बताते हुए स्थिति स्पष्ट की.

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जर्मन चांसलर का कहना था कि जर्मनी के साथ समझौते से भारत की रूस पर निर्भरता कम होगी. (Photo- ITG) जर्मन चांसलर का कहना था कि जर्मनी के साथ समझौते से भारत की रूस पर निर्भरता कम होगी. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:47 PM IST

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत यात्रा पर हैं और इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी अहम बैठकें हुईं. दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, उद्योग और रणनीतिक साझेदारी को लेकर कई समझौते भी हुए. हालांकि, इसी बीच जर्मन चांसलर के एक बयान ने नई बहस को जन्म दे दिया, जिस पर भारत को औपचारिक रूप से अपना पक्ष रखना पड़ा.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, "जर्मनी भारत के साथ रक्षा उद्योग सहयोग को और गहरा करना चाहता है. इससे दोनों देशों को मजबूती मिलेगी और इससे भारत की रूस पर निर्भरता भी कम होगी." मर्ज के इस बयान को भारत की पारंपरिक रक्षा खरीद नीति से जोड़कर देखा गया, जिस पर सवाल उठने लगे.

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इस बयान के बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारत का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि जर्मन चांसलर का बयान भारत के संदर्भ में रक्षा और सुरक्षा नीति को लेकर जर्मनी के बदले हुए नजरिए की ओर इशारा करता है, न कि भारत की किसी रणनीतिक मजबूरी की ओर. मिसरी ने कहा, "हमारी रक्षा खरीद नीति पूरी तरह से हमारे राष्ट्रीय हितों से संचालित होती है. यह किसी भी तरह से वैचारिक नहीं है."

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भारत की रक्षा खरीद को किसी एक देश के साथ जोड़ना ठीक नहीं!

विदेश सचिव ने यह भी साफ किया कि भारत की रक्षा खरीद को किसी एक देश से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कहूंगा कि एक देश से खरीद को दूसरे देश से खरीद से जोड़ा जाए. अगर हम किसी उपकरण का घरेलू निर्माण नहीं कर रहे हैं और उसे बाहर से लेना है, तो हम यह देखते हैं कि दुनिया में उसे सबसे सुविधाजनक, भरोसेमंद और लाभकारी तरीके से कहां से हासिल किया जा सकता है."

भारत आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को देता है प्राथमिकता

विक्रम मिसरी ने जोर देकर कहा कि भारत आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को प्राथमिकता देता है, लेकिन जहां जरूरत होती है, वहां वैश्विक विकल्पों पर विचार किया जाता है. इसमें किसी भी देश के प्रति पक्षपात या विरोध का सवाल नहीं है.

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कैसे हैं जर्मनी और रूस के साथ भारत के रिश्ते?

भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग हाल के वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है. दोनों देश रक्षा तकनीक, संयुक्त उत्पादन और इंडस्ट्रियल पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने पर सहमत हैं. जर्मनी भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है, जबकि भारत यूरोप में जर्मनी को एक भरोसेमंद सहयोगी मानता है.

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